Corporate AI Spending: क्या कंपनियों का AI पर निवेश बेकार जा रहा है? मुनाफे और खर्च का बड़ा गैप

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Corporate AI Spending: क्या कंपनियों का AI पर निवेश बेकार जा रहा है? मुनाफे और खर्च का बड़ा गैप

कंपनियां तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर पैसा खर्च कर रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि **30%** से कम कंपनियों को ही इसका सीधा असर अपने बॉटम-लाइन (Profit) पर दिख रहा है। ज्यादातर जगह केवल छोटे बदलाव हो रहे हैं, जो बड़े मुनाफे में नहीं बदल पा रहे हैं।

पिछले कुछ सालों में दुनिया भर की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने की होड़ में शामिल हैं और अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इस तकनीक पर खर्च कर रही हैं। हालांकि, 2026 के अंत तक एक कड़वा सच सामने आया है: AI पर काम करने और असल में मुनाफा कमाने के बीच एक गहरी खाई है। ज्यादातर एग्जीक्यूटिव्स का कहना है कि वे AI से खुश हैं, लेकिन बहुत कम कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें यह प्रॉफिट में बड़ा उछाल देते हुए दिख रहा है।

एफिशिएंसी बनाम प्रॉफिट का विरोधाभास

सबसे बड़ी समस्या यह है कि AI से मिलने वाली प्रोडक्टिविटी का फायदा असल वित्तीय ग्रोथ में नहीं दिख रहा है। अक्सर कर्मचारी छोटे-मोटे कामों में समय तो बचा लेते हैं, लेकिन वह समय किसी ऐसे काम में नहीं लग पाता जिससे कंपनी की लागत कम हो सके। यह बचा हुआ समय मीटिंग्स या एडमिनिस्ट्रेटिव कामों में खर्च हो जाता है, जिससे फाइनेंस टीम को बैलेंस शीट पर कोई बचत नहीं दिखती।

'पायलट ट्रैप' और बढ़ता खर्च

कंपनियां अक्सर 'पायलट ट्रैप' में फंसी हुई हैं, जहाँ वे दर्जनों छोटे और अलग-थलग AI एक्सपेरिमेंट कर रही हैं। ये प्रोजेक्ट्स सुनने में तो काफी एडवांस लगते हैं, लेकिन ये कंपनी के उन बड़े ऑपरेशन्स पर असर नहीं डाल पाते जो असली मुनाफा तय करते हैं। साथ ही, कंप्यूटिंग पावर और स्पेशलाइज्ड टूल्स का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जो कि AI से होने वाली संभावित कमाई को भी निगल रहा है।

निवेशकों के लिए जरूरी सबक

अब निवेशकों को यह पूछना बंद करना चाहिए कि 'क्या कंपनी AI का इस्तेमाल कर रही है?', बल्कि यह देखना चाहिए कि 'क्या AI से बॉटम-लाइन पर असर पड़ रहा है?'

सफल कंपनियां वही हैं जो AI का इस्तेमाल सप्लाई चेन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और प्रोक्योरमेंट जैसे कोर बिजनेस में कर रही हैं। निवेशकों को तिमाही नतीजों में यह देखना चाहिए कि मैनेजमेंट 'नंबर ऑफ प्रोजेक्ट्स' की बात कर रहा है या फिर 'टेंजिबल सेविंग्स' (स्पष्ट बचत) की। अगर कोई कंपनी केवल पायलट प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है, तो समझ लीजिए कि वह अभी भी एक्सपेरिमेंट के दौर में है और असली बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन अभी बाकी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.