बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ContentLens ने एक नया AI-आधारित प्लेटफॉर्म पेश किया है। यह टूल सेलिब्रिटीज के अनधिकृत डीपफेक, वॉइस क्लोन और सोशल मीडिया पर होने वाले फर्जी विज्ञापनों की तुरंत पहचान करेगा।
जेनरेटिव AI की बढ़ती रफ्तार ने मशहूर हस्तियों और ब्रांड्स के लिए एक बड़ी डिजिटल सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। इस समस्या से निपटने के लिए बेंगलुरु के स्टार्टअप ContentLens ने एक ऐसा AI-पावर्ड प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो किसी भी सेलिब्रिटी की नकल, आवाज या डीपफेक वीडियो को तुरंत पकड़ लेगा। जैसे-जैसे डिजिटल पहचान एक बड़ी फाइनेंशियल एसेट बनती जा रही है, यह फर्म रीयल-टाइम प्रोटेक्शन देकर ब्रांड्स को होने वाले नुकसान से बचाएगी।
यह तकनीक कैसे काम करती है?
यह प्लेटफॉर्म हर क्लाइंट के लिए एक यूनिक 'बायोमेट्रिक सिग्नेचर' (Biometric Signature) बनाता है। यह एक डिजिटल फुटप्रिंट की तरह काम करता है, जो लगातार सोशल मीडिया पर नजर रखता है। यदि सिस्टम को किसी अनधिकृत इस्तेमाल का पता चलता है, तो यह तुरंत मैनेजमेंट टीम को अलर्ट भेज देता है। साथ ही, यह फोरेंसिक सबूत भी तैयार करता है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट को हटवाने (Takedown) या कानूनी कार्रवाई में काफी मदद मिलती है।
म्यूजिक इंडस्ट्री पर खास फोकस
कंपनी के CEO रोहन साहू ने अपने प्लेटफॉर्म को इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री के साथ जोड़ने पर जोर दिया है। इसका मुख्य मकसद म्यूजिक की चोरी रोकना और AI ट्रेनिंग में बिना अनुमति के इस्तेमाल होने वाले कंटेंट को सुरक्षित रखना है। कंपनी ने अपने बिजनेस को चार हिस्सों में बांटा है: कंटेंट प्रोवेनेंस, वाटरमार्किंग, म्यूजिक IP प्रोटेक्शन और काउंटरफीट ब्रांड डिटेक्शन।
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
Tips Music Limited के पूर्व CEO और कंपनी के स्ट्रैटेजिक एडवाइजर हरि नायर के अनुसार, बाजार में पहचान का अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे बड़े पैमाने पर कंज्यूमर स्कैम हो रहे हैं। इन्वेस्टर्स के लिए यह सेक्टर अब डिजिटल राइट्स के लिहाज से काफी अहम हो गया है। कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि सोशल मीडिया कंपनियां इनके द्वारा दिए गए फोरेंसिक सबूतों पर कितनी जल्दी रिस्पॉन्स देती हैं और डिजिटल बायोमेट्रिक सुरक्षा को लेकर कानूनी ढांचा कितना मजबूत होता है।
