भारतीय कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियां Q2 FY27 के नतीजों के लिए तैयार हैं। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या क्विक कॉमर्स में हो रहा भारी विस्तार अब मुनाफे में बदल रहा है या बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लागत मार्जिन पर दबाव डाल रही है।
Q2 FY27 के अर्निंग्स सीजन की शुरुआत के साथ ही भारतीय कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों के लिए एक बड़ी परीक्षा शुरू हो गई है। हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है, लेकिन बाजार का ध्यान अब क्विक कॉमर्स सेक्टर की वित्तीय सेहत पर टिक गया है। निवेशक यह देख रहे हैं कि डार्क स्टोर्स और डिलीवरी नेटवर्क में किया गया निवेश अब ऑपरेटिंग मार्जिन में तब्दील हो रहा है या नहीं।
क्विक कॉमर्स का खेल और मार्केट शेयर
क्विक कॉमर्स मार्केट आज करीब ₹1.08 लाख करोड़ का हो चुका है और यह सालाना 40% की रफ्तार से भाग रहा है। हालांकि, यह ग्रोथ काफी महंगी साबित हो रही है। Zomato की क्विक कॉमर्स विंग 'Blinkit' करीब 46% मार्केट शेयर के साथ लीडर बनकर उभरी है। निवेशक अब यह ट्रैक कर रहे हैं कि क्या कंपनी का ऑपरेटिंग लेवरेज उम्मीद के मुताबिक बेहतर हो रहा है। वहीं, Swiggy Instamart के लिए रास्ता थोड़ा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि 21-24% मार्केट शेयर होने के बावजूद घाटा अभी भी एक बड़ी चिंता बना हुआ है।
प्रतिस्पर्धा का बढ़ता दबाव
Flipkart Minutes और अन्य नए प्लेयर्स की एंट्री ने मार्केट को काफी क्राउडेड बना दिया है। ग्राहकों को बनाए रखने के लिए मार्केटिंग और डिस्काउंट पर खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर बॉटम लाइन पर दिख रहा है। Zomato का स्टॉक भी अभी FY28 की अनुमानित कमाई के 100 गुना वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जिससे बाजार की उम्मीदें काफी ऊंची हैं।
अन्य दिग्गजों का हाल
Meesho के लिए दूसरी तिमाही में ग्रोथ कुछ धीमी रह सकती है, क्योंकि कंपनी ने अपनी 'मेगा ब्लॉकबस्टर सेल' को तीसरे क्वार्टर में शिफ्ट कर दिया है। वहीं, Info Edge अपने कोर बिजनेस यानी Naukri के दम पर स्थिर प्रदर्शन कर रही है।
आने वाले समय में फूड इन्फ्लेशन और मौसम संबंधी बदलाव भी कंज्यूमर स्पेंडिंग को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना होगा कि कंपनियां मार्केट शेयर की होड़ में कैश बर्न मॉडल को कितना टिकाऊ रख पाती हैं।
