Coforge का दम! अप्रैल में भारतीय कंपनियों का विदेशी निवेश ₹27,500 करोड़ के पार, कंपनी ने किया बड़ा दांव

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AuthorNeha Patil|Published at:
Coforge का दम! अप्रैल में भारतीय कंपनियों का विदेशी निवेश ₹27,500 करोड़ के पार, कंपनी ने किया बड़ा दांव
Overview

अप्रैल महीने में भारतीय कंपनियों ने विदेश में डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ODI) में जबरदस्त तेजी दिखाई है। कुल निवेश **$3.37 बिलियन (लगभग ₹27,500 करोड़)** तक पहुंच गया। इस उछाल की अगुआई IT कंपनी Coforge ने की, जिसने अकेले **$2.36 बिलियन** का नया निवेश किया। यह दिखाता है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं और रुपये में गिरावट के बावजूद भारतीय कंपनियां विदेशों में अपना विस्तार कर रही हैं।

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Coforge के बूते अप्रैल में विदेश में निवेश का बूम

अप्रैल में भारतीय कंपनियों का ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ODI) $3.369 बिलियन तक जा पहुंचा, जो मार्च के $1.613 बिलियन से लगभग दोगुना है। इस तूफानी तेजी के पीछे मुख्य वजह IT कंपनी Coforge रही, जिसने दो बड़े निवेशों के जरिए कुल $2.365 बिलियन विदेश में लगाए। यह भारी-भरकम निवेश ऐसे समय में हुआ जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है और भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखी जा रही है।

चंद कंपनियों का रहा दबदबा

अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ पांच भारतीय कंपनियों ने विदेश में किए गए कुल इक्विटी निवेश का करीब 86% हिस्सा अपने नाम किया। Coforge के अलावा, Lupin ने $229 मिलियन, Wingify Software ने $156.8 मिलियन, Knack Global ने $82.97 मिलियन, और Qlar Technology India ने $54.07 मिलियन का निवेश किया।

हालांकि, इक्विटी निवेश में जोरदार उछाल के बावजूद, कुल फाइनेंशियल कमिटमेंट्स (जिसमें कर्ज और गारंटी भी शामिल हैं) में मार्च की तुलना में 11% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह $5.644 बिलियन रहा। लेकिन, पिछले साल अप्रैल की तुलना में यह आंकड़ा 10.81% कम है।

Coforge की वैल्यूएशन और IT सेक्टर का हाल

Coforge, जिसने इस निवेश ट्रेंड में अहम भूमिका निभाई, की मार्केट कैप करीब ₹61,021 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो 30.49-43.31 के बीच है, जो इसके ग्रोथ-फोक्स्ड वैल्यूएशन की ओर इशारा करता है। वहीं, भारतीय IT सेक्टर में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025 तक IT एक्सपोर्ट $224 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और 2021 तक यह सेक्टर GDP में करीब 8% का योगदान दे रहा था। भू-राजनीतिक जोखिमों और करेंसी में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बावजूद, इस सेक्टर और Coforge जैसी कंपनियों ने मजबूती दिखाई है।

आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच निवेश

अप्रैल में हुआ यह बड़ा विदेशी निवेश ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व समेत कई जगहों पर भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है और भारतीय रुपया कमजोर हो रहा है। अप्रैल 2026 तक रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, जो 94.80 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। इसकी एक वजह फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का पैसा निकालना और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ($117 प्रति बैरल औसत अप्रैल 2026 में) भी रही हैं। 2026 में FIIs लगातार भारतीय इक्विटी में बिकवाली करते रहे हैं और ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता और बढ़ती ब्याज दरों के बीच करीब ₹2.2 लाख करोड़ निकाल चुके हैं।

बड़े निवेश पर RBI की नजर?

अप्रैल के मजबूत ODI आंकड़ों के बावजूद, भारत की कुल आउटबाउंड FDI कमिटमेंट्स अप्रैल 2026 में साल-दर-साल 10.8% घटकर $5.6 बिलियन रह गई। खबरें हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी निवेशों पर अपनी निगरानी बढ़ा रहा है और विदेशी वेंचर्स के उद्देश्य और ढांचे के बारे में जानकारी मांग रहा है। यह कदम फाइनेंशियल ईयर 2026 में ODI आउटफ्लो के $27 बिलियन तक पहुंचने के बाद उठाया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निवेश वास्तविक व्यावसायिक मंशा से हो रहा है और मुनाफा सही ढंग से वापस आ रहा है।

तुलना के लिए, Lupin का वैल्यूएशन करीब ₹1,04,400 करोड़ है और इसका P/E 16.42-19.62 के बीच है। Wingify Software, जिसने 2025 में $200 मिलियन का अधिग्रहण किया था, ने 2025 में $50.5 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया था और इसका वैल्यूएशन $250 मिलियन था।

जोखिम और भविष्य की राह

विदेशों में निवेश का यह उछाल ऐसे वैश्विक माहौल में हुआ है जहां भू-राजनीतिक अस्थिरता और करेंसी में बड़े उतार-चढ़ाव का खतरा बना हुआ है। जहां Coforge जैसी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर रही हैं, वहीं गिरता हुआ रुपया और बढ़ती कमोडिटी की कीमतें उनमें निहित जोखिम पैदा करती हैं। RBI की बढ़ती निगरानी यह संकेत देती है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विदेशी निवेश व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप हों और लाभ की स्वदेश वापसी से भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा हो। FIIs का पैसा निकालना जारी रहने और रुपये पर दबाव बने रहने की स्थिति में, भारतीय कंपनियों को विदेश में निवेश करते समय इन बाहरी चुनौतियों का सावधानी से सामना करना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.