Cisco के CEO Chuck Robbins ने भारत में अपने सिलिकॉन डिजाइन ऑपरेशंस को बढ़ाने और 'सॉवरेन क्रिटिकल टेक्नोलॉजी' लॉन्च करने का ऐलान किया है। कंपनी भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा का उपयोग AI इंफ्रास्ट्रक्चर के अपने वैश्विक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए करेगी।
भारत बनेगा इंजीनियरिंग का ग्लोबल हब
नई दिल्ली में आयोजित 'Bloomberg New Economy Forum' के दौरान, Cisco के चेयरमैन और CEO Chuck Robbins ने स्पष्ट किया कि भारत अब कंपनी की ग्लोबल इंजीनियरिंग रणनीति का केंद्र होगा। कंपनी न केवल अपनी मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग को और विस्तार देगी, बल्कि स्थानीय इंजीनियरिंग टीमों को सीधे ग्लोबल चिप आर्किटेक्चर डेवलपमेंट से जोड़ेगी। इस कदम से Cisco नेटवर्किंग और AI हार्डवेयर के क्षेत्र में अपनी इनोवेशन की रफ्तार को तेज करना चाहती है।
इसके अलावा, कंपनी भारत में अपनी 'सॉवरेन क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर' पोर्टफोलियो लॉन्च करने जा रही है। यह सुविधा सरकारों और बड़े कॉरपोरेट्स को उनके डिजिटल नेटवर्क और डेटा सुरक्षा पर पूर्ण नियंत्रण देगी, ताकि उन्हें विदेशी होस्टिंग सिस्टम्स पर निर्भर न रहना पड़े।
उभरते बाजारों पर नजर
Cisco का ध्यान अब उत्तरी अमेरिका से हटकर भारत और मध्य-पूर्व जैसे हाई-ग्रोथ बाजारों पर है। कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर अपनी ताकत दिखाते हुए फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए हाइपरस्केलर्स से $9.3 बिलियन के भारी-भरकम ऑर्डर हासिल किए हैं। यह ऑर्डर AI मॉडल को पावर देने के लिए आवश्यक नेटवर्किंग हार्डवेयर की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
चुनौतियां और रिस्क फैक्टर
लंबे समय के लिए यह ग्रोथ सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को कुछ वित्तीय मोर्चों पर सतर्क रहना होगा। हाई मेमोरी कॉस्ट और प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव के कारण Cisco के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही, 'सॉवरेन टेक्नोलॉजी' को लागू करने के लिए कड़े साइबर सिक्योरिटी और डेटा रेगुलेशन मानकों का पालन करना होगा, जो ऑपरेशनल स्तर पर जटिलताएं पैदा कर सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह नई रणनीति मैन्युफैक्चरिंग लागत को नियंत्रित कर कंपनी के ग्रॉस मार्जिन में सुधार ला पाएगी या नहीं।
