ग्लोबल स्तर पर AI चिप्स की भारी मांग ने इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में 'चिपफ्लेशन' पैदा कर दिया है। भारत में एंट्री-लेवल स्मार्टफोन्स की कीमतें **32%** तक बढ़ गई हैं और यह दबाव **2027** तक बने रहने की आशंका है।
दुनियाभर में AI इंफ्रास्ट्रक्चर की जबरदस्त मांग के कारण सेमीकंडक्टर मार्केट में बड़ा बदलाव आया है। Samsung, Micron और SK Hynix जैसी कंपनियां अब डेटा सेंटर्स के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स को प्राथमिकता दे रही हैं। इसका सीधा असर आम कंज्यूमर डिवाइसेज पर पड़ रहा है, जिसे अब 'चिपफ्लेशन' का नाम दिया जा रहा है।
भारतीय बाजार पर मार
Counterpoint Research के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में भारत में स्मार्टफोन्स की औसत कीमत में 16% का इजाफा हुआ है। सबसे बुरा असर ₹10,000 से कम कीमत वाले बजट स्मार्टफोन्स पर पड़ा है, जिनकी कीमतें 32% तक महंगी हो गई हैं। कंपनियों के लिए मेमोरी चिप्स लागत का एक बड़ा हिस्सा होती हैं, ऐसे में या तो उन्हें दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं या फीचर्स में कटौती करनी पड़ रही है।
भारत की तैयारी और चुनौती
भारत में Tata Electronics और Micron का ATMP प्लांट तेजी से काम कर रहा है, लेकिन फिलहाल ये यूनिट्स केवल असेंबली और पैकेजिंग पर केंद्रित हैं। चिप निर्माण (Wafer Fabrication) का काम अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए ये घरेलू प्लांट 2027 से पहले ग्लोबल सप्लाई चेन के संकट को कम करने की स्थिति में नहीं हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कंपनियां अब लंबी अवधि के सप्लाई एग्रीमेंट्स (Long-term supply agreements) पर जोर दे रही हैं ताकि प्रोडक्शन न रुके। हालांकि, निवेशकों को कंपनियों के मार्जिन पर पैनी नजर रखनी होगी। आने वाली तिमाही नतीजों में यह देखना जरूरी होगा कि कंपनियां लागत बढ़ने का बोझ खुद उठाती हैं या ग्राहकों पर डालती हैं। चिप्स की यह कमी 2027 तक जारी रहने के संकेत हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के शेयरों के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर बना हुआ है।
