बीजिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रेगुलेशन के अपने पुराने 'क्रैकडाउन' वाले रवैये को बदल दिया है। अब सरकार अचानक बैन लगाने के बजाय पहले से ही गाइडलाइंस तय कर रही है, ताकि मार्केट में 2021 जैसी उठा-पटक न हो।
चीन ने अपनी रेगुलेटरी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। 2021 में टेक सेक्टर पर हुई अचानक और सख्त कार्रवाई से शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था। अब बीजिंग अपनी गलती से सीखते हुए एक 'प्रोएक्टिव' और 'एजाइल' मॉडल अपना रहा है।
कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
नियमों में स्पष्टता तो आई है, लेकिन Compliance का बोझ कम नहीं हुआ है। जनरेटिव AI और एल्गोरिदम से जुड़ी कंपनियों को अब अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी असेसमेंट और सख्त कंटेंट गाइडलाइंस का पालन करना होगा। यह प्रक्रिया छोटे स्टार्टअप्स के लिए काफी महंगी साबित हो सकती है, जबकि Alibaba, Tencent और Baidu जैसे बड़े दिग्गज इन खर्चों को आसानी से उठा सकते हैं। इससे मार्केट में एकाधिकार (Monopoly) का खतरा भी बढ़ रहा है।
नेशनल सिक्योरिटी और रिस्क
बीजिंग अब एडवांस्ड AI मॉडल्स को 'नेशनल एसेट' मान रहा है। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में इन मॉडल्स के एक्सपोर्ट पर कड़ी पाबंदियां लग सकती हैं, जो इन टेक कंपनियों की ग्लोबल कमाई पर असर डालेगी। साथ ही, कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर को 'सोशलिस्ट कोर वैल्यूज' के अनुसार ढालना होगा, जिससे किसी भी वक्त तुरंत और महंगा बदलाव करने का दबाव बना रहेगा।
निवेशकों के लिए अब यह देखना जरूरी है कि सरकार की यह नई नीति एक्सपोर्ट पॉलिसी और कंपनी के मुनाफे पर कितना असर डालती है।
