China ने AI चिप एक्सपोर्ट पर पाबंदियां लगाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे 'कोल्ड वॉर' की रणनीति बताया है। 24 सितंबर, 2026 को होने वाले Trump-Xi समिट से पहले इस बयान के चलते ग्लोबल टेक शेयरों में दबाव देखने को मिला है।
चीन ने आधिकारिक तौर पर AI चिप्स के एक्सपोर्ट को सीमित करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को धीमा करने वाली हालिया मांगों को ठुकरा दिया है। बीजिंग का यह रुख AI कंपनी Anthropic के CEO के उस प्रस्ताव के जवाब में आया है, जिसमें सुरक्षा खतरों को कम करने के लिए सख्त ग्लोबल कंट्रोल की वकालत की गई थी। चीनी अधिकारियों ने इन सुझावों को सुरक्षा के नाम पर तकनीकी प्रगति को रोकने का प्रयास करार दिया और इसे 'कोल्ड वॉर' के दौर की रणनीति बताया।
Trump-Xi समिट का इंतजार
यह घटनाक्रम राष्ट्रपति Donald Trump और राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच 24 सितंबर, 2026 को होने वाली हाई-प्रोफाइल बैठक से ठीक पहले सामने आया है। इस समिट में ग्लोबल टेक्नोलॉजी गवर्नेंस, ट्रेड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में लीडरशिप पाने की होड़ जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
जियोपॉलिटिकल तनाव और मार्केट पर असर
यह खींचतान दिखाती है कि AI को लेकर अमेरिका और चीन के नजरिए में कितना गहरा अंतर है। जहां अमेरिका के कुछ इंडस्ट्री लीडर्स तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए सख्त एक्सपोर्ट कंट्रोल चाहते हैं, वहीं राष्ट्रपति Donald Trump का मानना है कि अमेरिका को AI की रेस जीतना प्राथमिकता देनी चाहिए।
इस अनिश्चितता के कारण 14 सितंबर, 2026 को ग्लोबल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। निवेशक अब इस डर में हैं कि यदि व्यापारिक बाधाएं बढ़ती हैं, तो इसका असर सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा। बाजार की नजरें अब पूरी तरह से 24 सितंबर की समिट पर टिकी हैं, जहां से यह स्पष्ट होगा कि क्या दोनों देश AI गवर्नेंस पर कोई कॉमन रास्ता निकाल पाएंगे या ट्रेड रिस्ट्रिक्शंस और भी कड़े होंगे।
