चीन की कंपनियों ने 2026 की पहली छमाही में 'Embodied AI' के लिए **322** डील्स के जरिए **$13 बिलियन** का भारी-भरकम फंड जुटाया है। अब ध्यान हार्डवेयर से हटकर सॉफ्टवेयर 'दिमाग' को विकसित करने पर है, ताकि अमेरिकी कंपनियों को टक्कर दी जा सके।
चीन का रोबोटिक्स सेक्टर 2026 में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। साल की पहली छमाही के आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों ने 'Embodied AI' में $13 बिलियन का भारी निवेश किया है। अब कंपनियां रोबोट के चलने या नाचने जैसे भौतिक कौशल के बजाय उनके सॉफ्टवेयर 'दिमाग' पर काम कर रही हैं, ताकि वे इंसानों की तरह सोच-समझ सकें और बाहरी दुनिया के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकें।
हार्डवेयर से सॉफ्टवेयर की ओर शिफ्ट
लंबे समय से रोबोटिक्स में मोबिलिटी (गतिशीलता) पर जोर दिया जा रहा था, लेकिन अब हार्डवेयर से मार्जिन कम होने के कारण डेवलपर्स सॉफ्टवेयर की ओर रुख कर रहे हैं। अब ऐसी प्रणालियां तैयार की जा रही हैं जो कारखानों में अजीबोगरीब वस्तुओं को संभालने या प्रोडक्शन लाइन में अनपेक्षित बदलावों को समझने में सक्षम हों। चीनी कंपनियां बड़े पैमाने पर डेटा जुटा रही हैं, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर टेस्टिंग ग्राउंड मिल रहा है।
चिप का संकट और अमेरिका से टक्कर
इस दौड़ का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी को पछाड़ना है। हालांकि, इस राह में Nvidia के एडवांस्ड AI चिप्स पर अमेरिका द्वारा लगाए गए एक्सपोर्ट कंट्रोल्स एक बड़ी रुकावट बने हुए हैं। चिप्स की किल्लत के कारण चीनी डेवलपर्स को या तो अपने सॉफ्टवेयर को कम शक्तिशाली हार्डवेयर के लिए ऑप्टिमाइज़ करना पड़ रहा है, या फिर खुद के विकल्प विकसित करने पड़ रहे हैं, जिससे जटिल मॉडल बनाने की रफ्तार धीमी हो रही है।
IPO और रेगुलेटरी रिस्क
निवेश के लिहाज से माहौल अब संभलकर चलने वाला है। चीन के रेगुलेटर्स ने कंपनियों के लिए पब्लिक लिस्टिंग (IPO) की राह कठिन कर दी है। अब कंपनियों को लिस्टिंग से पहले ठोस रेवेन्यू और असली कमर्शियल ऑर्डर्स साबित करने होंगे। निवेशकों के लिए असली चुनौती यह है कि कौन से स्टार्टअप इस भीड़ में टिक पाएंगे और प्रोटोटाइप से कमर्शियल स्केल तक पहुंच पाएंगे।
