Canon India अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में कदम रखने जा रही है। कंपनी देश में बढ़ती चिप मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को लिथोग्राफी इक्विपमेंट सप्लाई करेगी। इसके साथ ही, कंपनी अपने कोर कैमरा बिजनेस पर निर्भरता कम करने के लिए मेडिकल इमेजिंग और सर्विलांस जैसे क्षेत्रों में अपना विस्तार कर रही है।
इमेजिंग से आगे की रणनीति
Canon India अब सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट मार्केट में प्रवेश करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भारत में बन रही नई चिप फैब्रिकेशन यूनिट्स को जरूरी तकनीक मुहैया कराना है। इसके लिए कंपनी अपनी ग्लोबल पैरेंट कंपनी की लिथोग्राफी एक्सपर्टाइज का लाभ उठाएगी। यह कदम कंपनी के लिए बड़ा रणनीतिक बदलाव है, जिसका उद्देश्य उसे पारंपरिक इमेजिंग और प्रिंटिंग सेगमेंट की निर्भरता से बाहर लाना है।
नए ग्रोथ इंजन की ओर कदम
सेमीकंडक्टर के अलावा, कंपनी का जोर सर्विलांस और मेडिकल डायग्नोस्टिक्स पर है। साल 2025 में कंपनी के सिक्योरिटी सॉल्यूशंस डिवीजन ने 43% की बढ़त दर्ज की है। Axis Communications और Milestone जैसी सब्सिडियरी कंपनियों के साथ मिलकर, Canon इस सेगमेंट में सालाना 40% से 50% की ग्रोथ बनाए रखने का लक्ष्य लेकर चल रही है। साथ ही, अगले 3 साल में मेडिकल डायग्नोस्टिक्स पोर्टफोलियो को अस्पतालों में बड़े पैमाने पर उतारने की योजना है।
कैमरा बिजनेस का महत्व
इंडस्ट्रियल और मेडिकल तकनीक की ओर शिफ्ट होने के बावजूद, कैमरा बिजनेस अभी भी कंपनी के लिए कमाई का बड़ा जरिया बना हुआ है। इंटरचेंजेबल-लेंस कैमरा सेगमेंट में कंपनी का 31% मार्केट शेयर है। भारतीय बाजार की खास बात यह है कि इसकी 60% फुल-फ्रेम कैमरा बिक्री केवल वेडिंग फोटोग्राफी से आती है। हालांकि यह एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स है, लेकिन यह बाजार के सीजनल ट्रेंड्स पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है।
चुनौतियां और भविष्य
कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। PowerShot सीरीज जैसे कॉम्पैक्ट कैमरों की मांग तो अधिक है, लेकिन प्रोडक्शन क्षमता सीमित है। इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन और सेमीकंडक्टर की कमी के चलते प्रिंटर्स और कैमरों की लागत बढ़ रही है, जो मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। नए क्षेत्रों में उतरने पर कंपनी को कड़े कंपटीशन का सामना करना पड़ेगा और निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि Canon अपनी पारंपरिक ताकत और नए पूंजी-गहन (capital-intensive) प्रोजेक्ट्स के बीच कैसे तालमेल बिठाती है।
