Calendly ने AI की दुनिया में कदम रखते हुए नए मीटिंग टूल्स लॉन्च किए हैं। कंपनी का नया AI नोट-टेकर और 'Callie' नाम का असिस्टेंट सेल्स और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स के लिए मीटिंग के बाद के कामों को ऑटोमेट करेगा।
मीटिंग्स अब होंगी ज़्यादा प्रोडक्टिव
Calendly, जो कि अपने शेड्यूलिंग सॉफ्टवेयर के लिए जानी जाती है, अब AI मीटिंग प्रोडक्टिविटी के क्षेत्र में उतर आई है। यह कदम कंपनी के लिए एक बड़ी स्ट्रैटेजिक शिफ्ट है, क्योंकि अब वे सिर्फ अपॉइंटमेंट बुक करने से आगे बढ़कर यूजर्स के लिए मीटिंग लाइफसाइकिल का पूरा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएंगे।
क्या हैं नए AI टूल्स?
कंपनी ने AI-पावर्ड 'नोट-टेकर' पेश किया है। यह टूल मीटिंग्स में शामिल होगा, वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड करेगा, बातचीत को ट्रांसक्राइब करेगा और ज़रूरी पॉइंट्स का सारांश (summary) भी देगा। इसके साथ ही, Calendly अपना AI असिस्टेंट 'Callie' भी लॉन्च कर रही है। यह असिस्टेंट कंपनी के मौजूदा शेड्यूलिंग डेटा के साथ इंटीग्रेट होगा, जिससे यूजर्स अपनी उपलब्धता को मैनेज कर सकेंगे, आने वाली कॉल्स की तैयारी कर सकेंगे और पिछली चर्चाओं की जानकारी याद रख सकेंगे। इसका मकसद सेल्स और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स के लिए वर्कफ़्लो को और भी स्मूथ बनाना है, क्योंकि वे रोज़ाना बड़ी संख्या में मीटिंग्स मैनेज करते हैं।
दिग्गजों से सीधी टक्कर
इस लॉन्च के साथ, Calendly सीधे तौर पर Otter, Fireflies और Fathom जैसे स्थापित प्रोडक्टिविटी प्लेटफॉर्म्स के साथ कंपीट करेगी। ये कंपनियां पहले से ही ऑटोमेटेड ट्रांसक्रिप्शन और मीटिंग समरी जैसी सुविधाएं देकर मार्केट में अपनी जगह बना चुकी हैं। इन नई क्षमताओं को जोड़कर, Calendly कोशिश कर रही है कि यूजर्स किसी थर्ड-पार्टी टूल पर निर्भर रहने के बजाय उसके इकोसिस्टम में ही रहें।
प्राइवेसी का भी रखा ध्यान
AI ट्रांसक्रिप्शन मार्केट में आजकल डेटा प्राइवेसी और यूजर की सहमति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए, Calendly ने ट्रांसपेरेंसी पर ज़ोर दिया है। कंपनी का कहना है कि रिकॉर्डिंग शुरू होने पर वे सभी पार्टिसिपेंट्स को सूचित करेंगे और अगर कोई चाहे तो AI को बातचीत से हटने का अनुरोध कर सकेगा।
Calendly एक प्राइवेट कंपनी है और भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों जैसे NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। लेकिन, इस स्पेस में उनका प्रवेश दिखाता है कि प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर्स पर जनरेटिव AI को अपनाकर रेलेवेंट बने रहने का कितना दबाव है। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे इन नई AI सुविधाओं को अपने कोर शेड्यूलिंग फंक्शन के साथ बिना किसी तकनीकी दिक्कत या यूजर एक्सपीरियंस से समझौता किए कैसे बैलेंस कर पाती है। इस नए प्रोडक्ट की सफलता यूजर्स की एडॉप्शन रेट्स पर निर्भर करेगी।
