CERT-In का सख्त रुख: AI के बढ़ते खतरों के बीच साइबर सिक्योरिटी ऑडिट अनिवार्य

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AuthorNeha Patil|Published at:
CERT-In का सख्त रुख: AI के बढ़ते खतरों के बीच साइबर सिक्योरिटी ऑडिट अनिवार्य

देश की नोडल साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने बुनियादी ढांचे के ऑडिट को और सख्त कर दिया है। एडवांस AI मॉडल्स और ऑटोनॉमस एजेंट्स से बढ़ते डिजिटल खतरों को देखते हुए सरकार अब कंपनियों से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रही है, जिससे कॉर्पोरेट जगत में साइबर सुरक्षा खर्च बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने तेजी से बदलते डिजिटल खतरों को भांपते हुए राष्ट्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। सरकार का मुख्य फोकस अब उन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर है जो पावरफुल जेनरेटिव AI मॉडल पैदा कर रहे हैं। अब बैंकिंग, टेलीकॉम और सरकारी सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए कड़े और अनिवार्य ऑडिट किए जाएंगे ताकि वे AI-संचालित साइबर हमलों को झेल सकें।

सख्त ऑडिट और सुरक्षा कवच

रेगुलेटर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऑटोनॉमस AI एजेंट्स का उदय है, जो सॉफ्टवेयर में खामियों को बेहद तेजी से ढूंढ सकते हैं। Anthropic के Claude Mythos जैसे मॉडल पारंपरिक सॉफ्टवेयर पैचिंग साइकिल से भी तेज गति से सिक्योरिटी फ्लॉज ढूंढने में सक्षम हैं। इसके जवाब में, CERT-In ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत कंपनियों को अब 'बेसिक प्रोटोकॉल' से आगे बढ़कर सक्रिय रूप से अपने नेटवर्क की कमजोरियां खुद ढूंढनी होंगी।

कॉर्पोरेट बजट पर बढ़ेगा दबाव

इन नियमों के सख्त होने से भारतीय कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा खर्च में बढ़ोतरी होना तय है। पुरानी 'रिएक्टिव' सुरक्षा (हमले के बाद सुधार) का दौर खत्म हो रहा है और अब 'प्रोएक्टिव' ऑडिट-हेवी फ्रेमवर्क का दौर शुरू हो गया है। जो कंपनियां अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक नहीं बनाएंगी, उन्हें रेगुलेटरी कार्रवाई और बड़े ऑपरेशनल रिस्क का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, आईटी और साइबर सुरक्षा सेवा प्रदाताओं के लिए यह मांग में भारी बढ़ोतरी का संकेत है।

AI-संचालित खामियों पर लगाम

सरकार को अब राष्ट्रीय डेटाबेस की सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। हालिया घटनाओं में देखा गया है कि रिसर्च-फोकस्ड AI एजेंट्स सुरक्षा प्रोटोकॉल को बायपास करके लाइव सिस्टम तक पहुंच गए थे। CERT-In ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी एआई एजेंट भारतीय सिस्टम को प्रभावित करता है, तो टेक फर्मों को समय पर इसका खुलासा करना होगा। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि भारतीय कंपनियां इन कड़े सुरक्षा मानकों के साथ खुद को कितनी जल्दी ढाल पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.