CERT-In ने भारतीय कंपनियों को आगाह किया है कि AI एजेंट्स में हालिया सुरक्षा सेंध किसी बड़े हैकिंग हमले का नतीजा नहीं, बल्कि बेसिक डिजिटल हाइजीन में कमी के कारण हुई है।
भारत के साइबर सुरक्षा नियामक, CERT-In ने खुलासा किया है कि हाल के दिनों में AI एजेंट्स के साथ हुई सुरक्षा घटनाओं के पीछे कोई एडवांस हैकिंग नहीं, बल्कि कंपनियों की बुनियादी लापरवाही थी। जांच में पाया गया कि पासवर्ड को प्लेन टेक्स्ट में रखना, सॉफ्टवेयर अपडेट न करना और क्लाउड परमिशन गलत तरीके से सेट करने के कारण संवेदनशील डेटा असुरक्षित हुआ।
कंपनियों के लिए बड़ा जोखिम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियों को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उनके सिस्टम में अनधिकृत पहुंच (Unauthorized access) हो चुकी है। यह 'विजिबिलिटी गैप' उन संस्थानों के लिए बड़ा जोखिम है जो भारी मात्रा में कस्टमर या फाइनेंशियल डेटा संभालते हैं। डेटा लीक होने से कंपनियों की साख पर बट्टा लग सकता है और रेगुलेटरी कार्रवाई का डर भी बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह अलर्ट उन सेक्टर्स के लिए चिंताजनक है जो AI ऑटोमेशन को तेजी से अपना रहे हैं, जैसे कि बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और IT कंसल्टिंग। जो कंपनियां अपने APIs (Application Programming Interfaces) को सही ढंग से सुरक्षित नहीं कर पा रही हैं, वे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
आने वाले समय में कंपनियों के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑडिट और डिजिटल डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना मजबूरी होगी। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो AI के साथ-साथ मजबूत गवर्नेंस और ह्यूमन ओवरसाइट (Human oversight) का पालन कर रही हैं। डिजिटल विस्तार के दौर में 'सिक्योरिटी फ्रेमवर्क' ही अब कंपनियों की क्वालिटी का नया पैमाना बनेगा।
