Bridge Green Upcycle और IIT Madras की साझेदारी, अब बैटरियों से निकलेगा 'लिथियम गोल्ड'

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AuthorAditya Rao|Published at:
Bridge Green Upcycle और IIT Madras की साझेदारी, अब बैटरियों से निकलेगा 'लिथियम गोल्ड'

क्लीन-टेक स्टार्टअप Bridge Green Upcycle ने IIT Madras के साथ हाथ मिलाया है। इस पार्टनरशिप का मकसद AI के जरिए पुरानी बैटरियों से लिथियम और अन्य कीमती मिनरल्स निकालने की तकनीक विकसित करना है, जिससे कंपनी अपने **₹1,000 करोड़** के विस्तार प्लान को रफ्तार दे सकेगी।

रिसर्च और टेक्नोलॉजी का मेल

SustainX 2026 कॉन्फ्रेंस में इस नई साझेदारी का ऐलान किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मैटेरियल्स साइंस का इस्तेमाल कर पुरानी बैटरियों से कोबाल्ट, निकेल और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स की रिकवरी को बढ़ाना है। यह पहल उन बैटरी मैन्युफैक्चरर्स के लिए बड़ी राहत है जो फिलहाल कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं।

तमिलनाडु में बड़ी तैयारी

कंपनी ने हाल ही में तमिलनाडु के गुममिडीपोंडी में अपना पहला सर्कुलैरिटी सेंटर शुरू किया है, जिसकी क्षमता 7,200 MTPA है। IIT Madras के साथ मिलकर कंपनी अपनी इस इंडस्ट्रियल प्रोसेस को और बेहतर बनाना चाहती है, ताकि पुराने केमिकल लीचिंग तरीकों पर निर्भरता कम हो सके और धातुओं की रिकवरी का प्रतिशत बढ़ाया जा सके।

₹1,000 करोड़ का मेगा इन्वेस्टमेंट

आने वाले 5 साल में कंपनी ₹500 करोड़ से ₹1,000 करोड़ तक का निवेश करने की योजना बना रही है। यह पैसा क्षमता विस्तार और रिफाइंड साल्ट प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल होगा। हालांकि, बैटरी रीसाइक्लिंग का यह सेक्टर काफी कैपिटल-इंटेंसिव है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए भारी फंड की दरकार होती है।

भविष्य की चुनौतियां

एक अर्ली-स्टेज कंपनी होने के नाते, इसके सामने टेक्नोलॉजी को कमर्शियल स्केल पर सफल बनाने की बड़ी चुनौती है। भविष्य में निरंतर फंडिंग और केमिकल प्रोसेसिंग की लागत को मैनेज करना कंपनी की सफलता की कुंजी होगा। निवेशक इस बात पर नजर बनाए रखें कि कैसे लैब की रिसर्च को कंपनी अपनी फैक्ट्री फ्लोर पर सफलतापूर्वक लागू करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.