1981 में नौकरी जाने के बाद Michael Bloomberg ने अपनी डेटा कंपनी की नींव रखी और Bloomberg Terminal बनाया जिसने फाइनेंस की दुनिया बदल दी। बावजूद इसके, यह आज भी एक प्राइवेट कंपनी है और इसे NSE या BSE पर ट्रेड नहीं किया जा सकता।
Bloomberg L.P. की कहानी किसी बोर्डरूम से नहीं, बल्कि एक करियर-खत्म करने वाली छंटनी से शुरू हुई। 1981 में जब Phibro Corporation ने Salomon Brothers का अधिग्रहण किया, तो 15 साल की सर्विस के बाद Michael Bloomberg को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उस समय उन्होंने $1 करोड़ के पेआउट के साथ एक बड़ी कमी देखी—फाइनेंशियल प्रोफेशनल डेटा पाने के लिए बहुत संघर्ष कर रहे थे।
टर्मिनल का जन्म
Bloomberg ने अपने खुद के $3,00,000 लगाकर 'Innovative Market Systems' की शुरुआत की। उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का सपना देखा जो डेटा, एनालिटिक्स और खबरों को एक ही जगह ला सके। इस प्रोजेक्ट को तब बड़ी उड़ान मिली जब Merrill Lynch ने इसे टेस्ट करने और $3 करोड़ का निवेश करके 30% हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया। 1982 तक, यह सिस्टम काम करने लगा था, जिसने ट्रेडर्स के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया।
प्राइवेट कंपनी का स्टेटस
ग्लोबल मार्केट में अपनी धाक जमाने के बावजूद, Bloomberg L.P. आज भी एक प्राइवेट कंपनी है। यह किसी भी पब्लिक स्टॉक एक्सचेंज जैसे NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। Michael Bloomberg के पास कंपनी की करीब 88% हिस्सेदारी है। कंपनी के पब्लिक लिस्टिंग (IPO) को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। अगस्त 2026 तक, रिटेल निवेशकों के लिए इसमें निवेश का कोई मौका नहीं है।
चुनौतियां और प्रतिस्पर्धा
Bloomberg L.P. का मुख्य प्रोडक्ट, 'टर्मिनल', आज LSEG (Refinitiv), FactSet और S&P Global जैसी बड़ी कंपनियों के साथ-साथ कई नए AI-बेस्ड फिनटेक प्लेटफॉर्म्स से कड़ी टक्कर ले रहा है। कंपनी का रेवेन्यू बड़े पैमाने पर टर्मिनल पर निर्भर है, जिससे बाजार में हो रहे तकनीकी बदलावों का रिस्क भी बना रहता है। साथ ही, कंपनी को डेटा प्राइवेसी और AI गवर्नेंस जैसे ग्लोबल नियमों का भी पालन करना पड़ता है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि भले ही Bloomberg डेटा और खबरों के जरिए बाजार को हिलाता हो, लेकिन यह खुद कोई ट्रेड करने वाला एसेट नहीं है।
