बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप BigEndian Semiconductors को सरकारी संस्था TDB ने **₹130 करोड़** की फंडिंग देने का ऐलान किया है। यह पैसा 'Project VeerAI' के तहत भारत में स्वदेशी AI-पावर्ड विजन चिप्स बनाने में खर्च होगा, जिससे विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम
BigEndian Semiconductors को यह वित्तीय मदद टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) से मिली है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करता है। यह कुल ₹260 करोड़ के 'Project VeerAI' का हिस्सा है। इस फंडिंग को 'Optional Convertible Debt' के रूप में दिया गया है, जिसका मतलब है कि सरकार भविष्य में इसे इक्विटी में बदल सकती है या पैसा वापस ले सकती है।
इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य सुरक्षा और डिफेंस सेक्टर के लिए सुरक्षित AI-इंटीग्रेटेड चिप्स तैयार करना है। अभी भारत चिप्स के लिए बाहर पर निर्भर है, जो डेटा प्राइवेसी के लिए रिस्क है। कंपनी अब इस टेक्नोलॉजी को लैब के प्रोटोटाइप (Technology Readiness Level 5) से निकालकर कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग (Level 9) तक ले जाने की तैयारी में है।
बाजार की बड़ी चुनौतियां
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में Qualcomm और Marvell जैसी दिग्गज कंपनियों का दबदबा है। इनके पास मोटा पैसा और दशकों पुराना अनुभव है। BigEndian के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल अपनी टेक्नोलॉजी को परफेक्ट बनाना है, बल्कि डिफेंस और सर्विलांस जैसे संवेदनशील ग्राहकों के कड़े टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रोसेस को पार करना भी है, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता है।
एग्जीक्यूशन रिस्क और निगरानी
हार्डवेयर स्टार्टअप्स के लिए कैपिटल खर्च बहुत ज्यादा होता है। चूंकि कंपनी अभी प्राइवेट है, इसलिए सरकारी फंड और वेंचर कैपिटल पर ही उसका पूरा दारोमदार है। अगर कंपनी तकनीकी लक्ष्यों को समय पर पूरा नहीं कर पाती या प्रोडक्शन में देरी होती है, तो कंपनी की वित्तीय सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी कैसे वास्तविक ऑर्डर हासिल करती है और अपने चिप्स की परफॉर्मेंस को रियल-वर्ल्ड में साबित करती है।
