फीचर फोन पर Bhim की एंट्री
Bhim Services Ltd ने मार्केट में 2% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रणनीति पेश की है। कंपनी अपने एप्लीकेशन को फीचर फोन यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने जा रही है। एमडी और सीईओ, Lalitha Nataraj ने इस पहल की घोषणा की है, जो Bhim के लिए एक बड़ा कदम है। अब तक एक रेफरेंस टूल के तौर पर पहचानी जाने वाली Bhim, अब डायरेक्ट डिजिटल पेमेंट्स के मैदान में उतरेगी। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ना है।
नए रेवेन्यू और बैंक पार्टनरशिप
कंपनी अपने रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए बैंकों के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रही है। इन पार्टनरशिप्स के ज़रिए Bhim प्लेटफॉर्म पर सीधे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बांटे जाएंगे। NPCI Bhim Services अपनी टेक्नोलॉजी को व्हाइट-लेबल करने के मॉडल पर भी विचार कर रही है, जिसका मतलब है कि यह अपनी कोर टेक्नोलॉजी को पार्टनर बैंकों के मौजूदा ऐप में इंटीग्रेट करेगी। इस तरीके से, Bhim हर बार सीधे यूजर एक्विजिशन की ज़रूरत के बिना, अपने मार्केट प्रेज़ेंस को काफी हद तक बढ़ा पाएगी।
शानदार ट्रांजैक्शन ग्रोथ
Bhim ने ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में ज़बरदस्त ग्रोथ दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, पिछले साल के मुकाबले टोटल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 301% की उछाल देखी गई। अप्रैल 2025 में जहां मंथली ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 5.93 करोड़ था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 21.6 करोड़ हो गया। मई 2026 तक, Bhim के पास लगभग 1.2 करोड़ मंथली एक्टिव ट्रांजैक्टिंग यूजर्स और 1.6 करोड़ मंथली लॉगिन यूजर्स थे। जनवरी 2025 में कैशबैक इंसेंटिव्स की शुरुआत इस ग्रोथ की एक बड़ी वजह रही, जिसने FY26 में 300% की सालाना बढ़ोतरी में योगदान दिया।
कॉम्पिटिटिव मार्केट और भविष्य की राह
भले ही Bhim फीचर फोन पर विस्तार और व्हाइट-लेबलिंग स्ट्रैटेजी से मार्केट शेयर हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन भारतीय डिजिटल पेमेंट्स का सेक्टर बेहद कॉम्पिटिटिव बना हुआ है। Google Pay, PhonePe, और Paytm जैसे बड़े प्लेयर्स पहले से ही बड़े यूजर बेस और एडवांस्ड फीचर्स के साथ मौजूद हैं। Bhim की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को कितनी प्रभावी ढंग से इंटीग्रेट कर पाती है और फीचर फोन यूजर्स व बैंकिंग पार्टनर्स दोनों को कितना वैल्यू दे पाती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि फाइनेंशियल इंक्लूजन पर फोकस अच्छा है, लेकिन लगातार ग्रोथ के लिए इनोवेशन और एस्टैब्लिश्ड कंपनियों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग की ज़रूरत होगी। कंपनी का फोकस यूजर एक्विजिशन और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पर है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी भी अहम होगी। इन पार्टनरशिप्स और व्हाइट-लेबल्ड सॉल्यूशंस के लॉन्ग-टर्म इम्पैक्ट का पता लगाने के लिए और ज़्यादा एनालिसिस की ज़रूरत है।
