BharatNet प्रोजेक्ट पर CAG की रिपोर्ट: 96% जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर, पर सिर्फ 33% चालू! मेंटेनेंस में बड़ी गड़बड़ी

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AuthorMehul Desai|Published at:
BharatNet प्रोजेक्ट पर CAG की रिपोर्ट: 96% जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर, पर सिर्फ 33% चालू! मेंटेनेंस में बड़ी गड़बड़ी

भारतनेट (BharatNet) प्रोजेक्ट को लेकर CAG की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, टारगेटेड ग्रामीण ग्राम पंचायतों में से 96.7% जगहों पर भले ही ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर लगा दिया गया हो, लेकिन असल में इनमें से केवल 33.2% ही चालू हालत में हैं। फाइबर में खराबी की ऊंची दर और उसे ठीक करने में लगने वाला लंबा समय ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी के लक्ष्य को धीमा कर रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और सेवा देने के बीच का यह अंतर वेंडर (Vendor) को पेमेंट मिलने और प्रोजेक्ट की लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े करता है।

CAG की रिपोर्ट में क्या है खास?

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने संसद में पेश अपनी परफॉरमेंस ऑडिट रिपोर्ट में भारतनेट प्रोजेक्ट के फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और असल चालू स्थिति के बीच बड़े अंतर को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 तक, टारगेटेड ग्राम पंचायतों के 96.70% हिस्से तक ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचा दिया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 33.20% लोकेशन ही अभी एक्टिव और ऑपरेशनल सर्विस दे पा रही हैं।

मेंटेनेंस की समस्याएँ बनीं बड़ी अड़चन

ऑडिट में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और मेंटेनेंस में गंभीर खामियों को इस बड़े अंतर का मुख्य कारण बताया गया है। सबसे बड़ी रुकावट फाइबर में खराबी की ऊंची दर है, जो 48% नॉन-ऑपरेशनल सर्विस मामलों के लिए जिम्मेदार है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि इन खराबियों को ठीक करने में औसतन 17 दिन का समय लग रहा है। यानी, कनेक्टिविटी ठीक होने में इतना लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य और ई-गवर्नेंस जैसे प्रोजेक्ट के सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को बड़ा झटका लग रहा है।

वित्तीय स्थिरता पर भी सवाल

प्रोजेक्ट की वित्तीय स्थिरता भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। शुरुआत में इसे आत्मनिर्भर बनाने की योजना थी, लेकिन अभी यह एक ऐसे मॉडल से जूझ रहा है जहाँ होने वाली आय की तुलना में मेंटेनेंस का खर्च बहुत ज्यादा है। ऑडिट में यह भी पाया गया कि सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (CPSU) मॉडल के तहत माइलस्टोन-बेस्ड पेमेंट स्ट्रक्चर के कारण अक्सर सर्विस की क्वालिटी कमजोर देखी गई है, खासकर प्राइवेट कंपनियों द्वारा लागू किए गए मॉडलों की तुलना में।

मार्केट के लिए क्या है मायने?

भारतनेट कोई एक अकेला स्टॉक नहीं है, लेकिन यह कई टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा है। HFCL, Tejas Networks, STL, और RVNL जैसी कंपनियां इक्विपमेंट सप्लाई और नेटवर्क रोलआउट में सीधे तौर पर शामिल हैं। CAG की रिपोर्ट में प्रोजेक्ट में देरी और ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी के निष्कर्ष बताते हैं कि इन कंपनियों को प्रोजेक्ट माइलस्टोन, पेमेंट साइकिल और संभावित पेनल्टी को लेकर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.