IIT बॉम्बे के नेतृत्व वाली भारत सरकार की 'भारतजेन' पहल, 'प्रोजेक्ट टैपिस्ट्री' ग्लोबल AI कंसोर्टियम का हिस्सा बन गई है। इस कदम से भारत को अपने डेटा पर नियंत्रण रखते हुए एडवांस AI मॉडल बनाने में मदद मिलेगी।
क्या हुआ?
भारत की AI क्षमताएं विकसित करने के लिए सरकारी पहल 'भारतजेन' (BharatGen) अब 'प्रोजेक्ट टैपिस्ट्री' (Project Tapestry) नामक एक वैश्विक कंसोर्टियम का हिस्सा बन गई है। यह कंसोर्टियम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एडवांस रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम करता है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत, भारतजेन, AI मॉडल की डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग (distributed training) पर केंद्रित वर्कस्ट्रीम का सह-नेतृत्व करेगा। इस ट्रेनिंग मेथड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि AI मॉडल को विभिन्न लोकेशन्स पर ट्रेन किया जा सकता है, बिना डेटा को सेंट्रलाइज किए। इससे भारत जैसे देश अपनी संवेदनशील जानकारी और राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना नियंत्रण बनाए रख सकते हैं।
भारतजेन की रणनीतिक भूमिका
भारतजेन, 'इंडियाएआई मिशन' (IndiaAI Mission) के तहत काम कर रहा है, जो देश में स्वदेशी AI क्षमताएं विकसित करने की एक बड़ी सरकारी योजना है। IIT बॉम्बे के एक कंसोर्टियम के नेतृत्व में, भारतजेन का मुख्य काम ऐसे फाउंडेशन मॉडल (foundation models) बनाना है जो भारत की 22 स्थानीय भाषाओं का समर्थन करें। इसका लक्ष्य AI टूल्स को भारत में स्वास्थ्य सेवा (healthcare), कानून (law) और वित्त (finance) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। 'प्रोजेक्ट टैपिस्ट्री' में शामिल होकर, भारतजेन वैश्विक प्रतिभा और संसाधनों का लाभ उठाना चाहता है, जिससे भारत ऐसे ओपन-सोर्स AI इंफ्रास्ट्रक्चर में योगदान दे सके और उसका लाभ उठा सके जिस पर किसी एक संस्था का नियंत्रण न हो।
इंडियाएआई मिशन का संदर्भ
इस कदम का महत्व समझने के लिए, हमें इसके पीछे के वित्तीय और संरचनात्मक समर्थन को देखना होगा। अप्रैल 2026 में, भारतजेन को ₹10,300 करोड़ के 'इंडियाएआई मिशन' के तहत ₹988.6 करोड़ का फंड मिला। इस मिशन का उद्देश्य भारत को वैश्विक AI परिदृश्य में एक लीडर के रूप में स्थापित करना है, ताकि विदेशी प्रोप्राइटरी AI मॉडलों पर निर्भरता कम हो सके। भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए, इस मिशन की सफलता महत्वपूर्ण है। यह संप्रभु AI इंफ्रास्ट्रक्चर (sovereign AI infrastructure) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे भारत में सार्वजनिक और निजी संगठनों के लिए लंबी अवधि में लाइसेंसिंग लागत कम हो सकती है और डेटा सुरक्षा में सुधार हो सकता है।
बिज़नेस और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती
हालांकि वैश्विक कंसोर्टियम में शामिल होने से साझा ज्ञान तक पहुंच मिलती है, लेकिन इन AI मॉडलों का वास्तविक दुनिया में कार्यान्वयन एक जटिल चुनौती बनी हुई है। एडवांस्ड AI विकसित करने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर, विशेष सेमीकंडक्टर (GPUs) और उच्च-गुणवत्ता वाले डेटा की आवश्यकता होती है।
निवेशकों और व्यापक टेक्नोलॉजी मार्केट के लिए, मुख्य ध्यान सिर्फ रिसर्च आउटपुट पर नहीं, बल्कि अंतर्निहित इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी होना चाहिए। भारतजेन जैसी पहलों की सफलता घरेलू कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता पर निर्भर करती है, और भारतीय IT सर्विसेज और हार्डवेयर सेक्टर की इन विशाल परियोजनाओं का समर्थन करने की क्षमता पर निर्भर करती है। इसके अलावा, उन वैश्विक टेक दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करना जिनके पास पहले से ही विशाल डेटासेट और कंप्यूट क्षमताएं हैं, एक महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों और पर्यवेक्षकों को दो मुख्य क्षेत्रों में भारतजेन की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। पहला, स्थानीय भाषाओं में विशिष्ट उपयोग के मामलों (use cases) की तैनाती की निगरानी करें, क्योंकि यह इन मॉडलों के वास्तविक दुनिया के मूल्य को साबित करेगा। दूसरा, इस बात पर ध्यान दें कि ये सरकारी-समर्थित पहल स्थानीय क्लाउड और डेटा सेंटर सेवाओं की मांग को कैसे प्रभावित करती हैं। बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान से बड़े पैमाने पर अपनाने तक परियोजना की क्षमता, भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का सच्चा परीक्षण होगी।
