6G टेक्नोलॉजी में भारत का दबदबा! 2030 तक ग्लोबल लीडर बनने की तैयारी, 7700+ पेटेंट फाइल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
6G टेक्नोलॉजी में भारत का दबदबा! 2030 तक ग्लोबल लीडर बनने की तैयारी, 7700+ पेटेंट फाइल

संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत 6G एलायंस (B6GA) की प्रगति की समीक्षा की है। यह बैठक 2030 तक 6G तकनीक में भारत को वैश्विक नेता बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित थी। अच्छी खबर यह है कि एलायंस के सदस्यों ने 5G और 6G तकनीकों से संबंधित **7,700 से अधिक पेटेंट** फाइल किए हैं।

6G में भारत की महत्वाकांक्षा

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को भारत 6G एलायंस (B6GA) की प्रगति का जायजा लिया। इस समीक्षा बैठक में राज्य मंत्री (संचार) चंद्रशेखर पेम्मासानी और टेलीकॉम सचिव अमित अग्रवाल भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा 2030 तक अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक में भारत को दुनिया में अग्रणी बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का मूल्यांकन करना था।

खास वर्किंग ग्रुप्स का गठन

भारत 6G एलायंस की स्थापना प्रधानमंत्री द्वारा मार्च 2023 में जारी 6G विजन डॉक्यूमेंट को सपोर्ट करने के लिए की गई थी। अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, एलायंस सात विशेष वर्किंग ग्रुप्स के माध्यम से काम कर रहा है। ये टीमें स्पेक्ट्रम आवंटन, भारत में 6G डिवाइस के निर्माण और आयातित समाधानों पर निर्भरता कम करके स्वदेशी तकनीक विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, सस्टेनेबल और ग्रीन टेक्नोलॉजी, 6G से रेवेन्यू जेनरेट करने के व्यावहारिक तरीके खोजना और टेक्नोलॉजी का वास्तविक दुनिया में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना भी फोकस एरिया में शामिल है।

रिसर्च और पेटेंट पर जोर

एलायंस की रणनीति का एक अहम हिस्सा मजबूत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) पोर्टफोलियो बनाना है। मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एलायंस के सदस्यों ने 5G और 6G तकनीकों से संबंधित 7,700 से अधिक पेटेंट फाइल किए हैं। इनमें से 4,400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग हैं। निवेशकों के लिए, यह घरेलू दूरसंचार इकोसिस्टम में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ती प्राथमिकता का संकेत देता है। 5G से 6G तक का सफर सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर डिप्लॉयमेंट नहीं, बल्कि कोर टेक्नोलॉजी के निर्माण की मांग करता है। यही वजह है कि पेटेंट फाइलिंग को अक्सर वैश्विक टेलीकॉम बाजार में देश की प्रतिस्पर्धी क्षमता का मापक माना जाता है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां और निगरानी

हालांकि रिसर्च पर यह फोकस लंबे समय में तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन 6G की वास्तविक तैनाती अभी भी एक दूर का लक्ष्य है। टेलीकॉम सेक्टर में भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, और इस इकोसिस्टम से जुड़ी कंपनियों को अक्सर रिसर्च, डेवलपमेंट और अंततः नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े खर्चों का सामना करना पड़ता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये रिसर्च पहलें कमर्शियल यूज केस में कैसे बदलती हैं और क्या भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी के परिपक्व होने पर इन नवाचारों का सफलतापूर्वक मुद्रीकरण कर पाती हैं। टेलीकॉम उपकरण निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं का वित्तीय प्रदर्शन इन नई, अप्रमाणित तकनीकों में निवेश करते हुए ऋण स्तरों को प्रबंधित करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा। अगले कुछ वर्षों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निगरानी योग्य कारक सात वर्किंग ग्रुप्स की प्रगति होगी और क्या वे 2030 के लक्ष्य के लिए निर्धारित तकनीकी मील के पत्थर को पूरा कर पाते हैं।

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