BNP Paribas ने Google Cloud के साथ **5 साल** का करार किया है। इसका मकसद बैंक के इंटरनल ऑपरेशंस, जैसे क्रेडिट रिसर्च और सेल्स को AI के जरिए तेज और स्मार्ट बनाना है।
बैंकिंग कामकाज में AI का तड़का
BNP Paribas अब अपनी बैंकिंग प्रक्रियाओं को पूरी तरह से अपग्रेड करने की तैयारी में है। बैंक ने 5 साल की एक बड़ी डील की है, जिसके तहत AI-पावर्ड एजेंट्स तैयार किए जाएंगे। ये एजेंट्स कॉरपोरेट क्रेडिट मेमो तैयार करने, सेल्स ऑपरेशंस को मैनेज करने और मार्केट रिसर्च जैसे कामों में तेजी लाएंगे।
सुरक्षा को लेकर खास 'हाइब्रिड' रणनीति
बैंक ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के साथ समझौता नहीं करेगा। कंपनी एक 'हाइब्रिड' (Hybrid) स्ट्रैटेजी अपना रही है। इसका मतलब है कि केवल सामान्य प्रशासनिक काम ही क्लाउड पर शिफ्ट किए जाएंगे। वहीं, बीमा डिवीजन का मेडिकल डेटा और अन्य संवेदनशील जानकारी बैंक के अपने प्राइवेट सर्वर पर ही सुरक्षित रहेगी।
डेटा की सुरक्षा और गूगल पर लगाम
इस साझेदारी की सबसे बड़ी शर्त यह है कि Google बैंक के इंटरनल डेटा का इस्तेमाल अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए नहीं कर सकेगा। साथ ही, बैंक ने यह भी सुनिश्चित किया है कि AI केवल उतनी ही जानकारी एक्सेस कर पाए, जितनी काम के लिए जरूरी है।
मल्टी-वेंडर अप्रोच पर बैंक का जोर
बैंक सिर्फ एक कंपनी पर निर्भर नहीं रहना चाहता। अपनी तकनीक को मजबूत करने के लिए वे Mistral जैसे फ्रेंच AI स्पेशलिस्ट और ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बैंक अपनी ऑपरेशनल इंडिपेंडेंस बनाए रखने में सफल रहेगा।
निवेशकों के लिए संकेत
इन्वेस्टर्स की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कैसे यह डील बैंक की ऑपरेशनल कॉस्ट को कम करती है। अगर AI के जरिए क्रेडिट अप्रूवल की रफ्तार बढ़ती है और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों में कटौती होती है, तो यह बैंक के प्रॉफिटेबिलिटी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
