BLS International Services ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा **8.6%** बढ़कर **₹201.7 करोड़** रहा, जबकि रेवेन्यू में **32%** की शानदार तेजी दिखी। हालांकि, बढ़ते खर्चों के कारण निवेशकों ने बिकवाली की और शेयर **2.09%** फिसलकर **₹215.50** पर बंद हुआ।
मुनाफे और रेवेन्यू का गणित
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें रेवेन्यू और मुनाफे के बीच का अंतर साफ झलक रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹201.7 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹185.7 करोड़ से 8.6% अधिक है। ऑपरेशनल रेवेन्यू 32% की छलांग के साथ ₹972.7 करोड़ पर पहुंच गया है।
इस ग्रोथ में डिजिटल सर्विसेज सेगमेंट का सबसे बड़ा हाथ रहा, जहां रेवेन्यू 66.4% उछलकर ₹462.7 करोड़ रहा। वहीं, वीजा और कांसुलर सर्विसेज से ₹510 करोड़ का रेवेन्यू आया, जिसमें 11.2% की बढ़त दर्ज की गई।
क्यों बढ़ी निवेशकों की टेंशन?
रेवेन्यू में 32% की जबरदस्त ग्रोथ के मुकाबले मुनाफे में केवल 8.6% की बढ़ोतरी यह बताती है कि कंपनी के खर्च तेजी से बढ़े हैं। मुख्य रूप से 'एम्प्लॉयी बेनिफिट एक्सपेंसेस' में 56.9% का भारी इजाफा हुआ है। इसके अलावा, हालिया अधिग्रहणों के कारण अमोर्टाइजेशन (Amortization) लागत भी बढ़ी है। कंपनी का EBITDA ₹248 करोड़ रहा, जिसमें वीजा सेगमेंट का मार्जिन 41.9% रहा।
मैनेजमेंट का फोकस और आगे की राह
मैनेजमेंट का कहना है कि ये बढ़ते खर्च केवल शॉर्ट-टर्म नहीं हैं, बल्कि ये कंपनी के लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक निवेश हैं। कंपनी अपना पूरा जोर AI-आधारित इकोसिस्टम और ऑटोमेशन पर लगा रही है ताकि भविष्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सके।
हालांकि, शेयर बाजार ने इन नतीजों पर फिलहाल सतर्क प्रतिक्रिया दी है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने बढ़ते खर्चों को कैसे कंट्रोल करती है और क्या डिजिटल सर्विसेज में यह रफ्तार बरकरार रह पाएगी। साथ ही, ग्लोबल मार्केट में जियोपॉलिटिकल हालातों का असर भी कंपनी के वीजा बिजनेस पर पड़ सकता है, जिस पर नजर रखना जरूरी होगा।
