जैसे-जैसे AI का खर्च बढ़ रहा है, कंपनियां अब लागत प्रभावी (cost-effective) मॉडल्स की ओर बढ़ रही हैं। BCG X की रिपोर्ट बताती है कि 2026 तक AI पर खर्च बढ़ेगा, लेकिन कंपनियां अब छोटे, सस्ते AI मॉडल्स पर ज्यादा ध्यान देंगी ताकि टोकन एक्सपेंस (token expenses) को कंट्रोल किया जा सके।
AI पर खर्च की नई रणनीति
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG X) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर खर्च अभी और बढ़ेगा। हालाँकि, अब वे इस पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं कि इस टेक्नोलॉजी से कितना फायदा हो रहा है। इसके चलते, कंपनियां अब ज़्यादा महंगे और बड़े AI मॉडल्स की जगह छोटे, ओपन-वेट (open-weight) मॉडल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। ये मॉडल रोज़मर्रा के कामों के लिए काफी हैं और इनकी लागत भी कम आती है। वहीं, बहुत मुश्किल कामों के लिए वे महंगे, हाई-कैपेसिटी वाले मॉडल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। इस तरीके से कंपनियां AI का इस्तेमाल जारी रखते हुए खर्चों को कंट्रोल कर सकेंगी।
निवेश का भविष्य और लीडर्स का नजरिया
सर्वे में 1,800 C-suite एग्जीक्यूटिव्स (सी-सूट एग्जीक्यूटिव्स) ने बताया कि 2025 से 2026 के बीच AI ट्रांसफॉर्मेशन (AI transformation) पर दोगुना रिसोर्स (resources) लगाया जाएगा। औसतन, AI पर होने वाला खर्च कंपनी के कुल रेवेन्यू (revenue) का लगभग 2% रहने का अनुमान है। यह भी देखा गया है कि 94% CEOs 2026 तक AI में निवेश बढ़ाने या कम से कम उतना ही बनाए रखने का इरादा रखते हैं, भले ही शुरुआत में रिटर्न-ऑन-इन्वेस्टमेंट (return-on-investment) के लक्ष्य पूरे न हुए हों। कई लीडर्स का मानना है कि अगर लक्ष्य पूरे नहीं होते, तो यह टेक्नोलॉजी की असफलता नहीं, बल्कि गलत प्लानिंग या इम्प्लीमेंटेशन (implementation) की कमी होती है।
भारत में AI अपनाने की चुनौती
भारत में AI का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा है, लगभग 95% कर्मचारी हफ्ते में कई बार AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, इस इस्तेमाल को बिजनेस वैल्यू (business value) में बदलना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में केवल 14% कंपनियां ही AI प्रोजेक्ट्स को सीधे प्रॉफिट-एंड-लॉस (profit-and-loss) मेट्रिक्स (metrics) से ट्रैक करती हैं। भारत में लीडरशिप (leadership) का जुड़ाव भी ग्लोबल लेवल से कम है। जहाँ दुनिया भर में 72% CEOs AI प्रोजेक्ट्स को लीड करते हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा सिर्फ 55% है। यह भी एक वजह हो सकती है कि भारत में कंपनियां पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर बड़े और प्रॉफिटेबल सॉल्यूशंस (solutions) बनाने में धीमी हैं।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
जो निवेशक AI का कंपनियों के मुनाफे पर असर देख रहे हैं, उन्हें यह देखना होगा कि कंपनियां सफलता को कैसे मापती हैं। AI को सिर्फ एक टेक्नोलॉजी की खरीद के तौर पर देखने की बजाय, इसे एक बड़े बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (business transformation) के रूप में देखना ज़रूरी है। निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि कंपनियां अपने इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) के खर्चों को कैसे मैनेज कर रही हैं, क्या वे बाहरी कंसल्टिंग (consulting) पर निर्भरता कम करने के लिए इंटरनल कैपेबिलिटी (internal capabilities) बना रही हैं, और क्या उन्होंने AI-संचालित प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट, मापने योग्य फाइनेंशियल मेट्रिक्स (financial metrics) तय किए हैं। जिन कंपनियों ने AI को सीधे मुनाफे से नहीं जोड़ा, उन्हें 2026 तक खर्च बढ़ने पर स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) की ओर से दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
