Axis Bank ने अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए Cognizant के साथ **5** साल का एक बड़ा करार किया है। इस डील का मुख्य उद्देश्य रिटेल और ट्रेजरी जैसे बैंकिंग ऑपरेशन्स को ऑटोमेट (Automate) कर कार्यक्षमता को बढ़ाना है।
ऑटोमेशन पर है बैंक का बड़ा दांव
Axis Bank ने अपने सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए Cognizant की 'AMS 2.0' सर्विस को चुना है। इस 5 साल के एग्रीमेंट का फोकस मैन्युअल बैक-एंड प्रोसेस को हटाकर उन्हें ऑटोमेटेड सिस्टम में बदलने पर है। यह पार्टनरशिप बैंक के रिटेल, होलसेल बैंकिंग, ट्रेजरी मैनेजमेंट और कार्ड प्रोसेसिंग जैसे अहम हिस्सों को कवर करेगी। इससे बैंक के डेटा प्लेटफॉर्म्स को स्ट्रीमलाइन करने में मदद मिलेगी और डेली लाखों ट्रांजेक्शन को मैनेज करना आसान हो जाएगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
आज के दौर में भारतीय बैंकों पर डिजिटल ट्रांजेक्शन और 24/7 सर्विस देने का भारी दबाव है। ऐसे में बैंकों का स्पेशलाइज्ड टेक कंपनियों के साथ जुड़ना एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है। Outsourcing के जरिए बैंक अपनी टेक्नोलॉजी कॉस्ट को स्टेबल रखना चाहते हैं ताकि वे अपना पूरा ध्यान कोर लेंडिंग और कस्टमर-फेसिंग प्रोडक्ट्स पर लगा सकें।
चुनौतियां और निगरानी (Monitorables)
हालांकि यह पार्टनरशिप बैंक की एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए है, लेकिन 5 साल की इस लंबी अवधि में इसके एग्जीक्यूशन की सफलता अहम होगी। निवेशकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के डेटा सिक्योरिटी और बिजनेस कंटिन्यूटी नियमों पर बैंक की सख्ती पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी तकनीकी खराबी या ट्रांजेक्शन में देरी बैंक की डिजिटल सर्विस क्वालिटी पर असर डाल सकती है। आने वाले समय में बैंक का 'कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो' इस डील की सफलता को मापने का सबसे बड़ा पैमाना होगा।
