Avenue Supermarts ने अपने ऑनलाइन किराना कारोबार, DMart Ready, का विस्तार रोक दिया है। कंपनी ने अपने ऑपरेशनल शहरों की संख्या 24 से घटाकर सिर्फ 11 कर दी है, और कई बाजारों से बाहर निकल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभप्रदता (Profitability) को बढ़ाना है।
घाटे को कम करने के लिए बड़ा फैसला
Avenue Supermarts, जो अपने लोकप्रिय DMart रिटेल चेन के लिए जानी जाती है, ने अपने ऑनलाइन किराना बिजनेस DMart Ready के शहरों की संख्या में भारी कटौती की है। पिछले एक साल में, कंपनी ने अपने ऑपरेशनल शहरों की संख्या आधे से भी ज्यादा कम कर दी है, जो पहले 24 थी, अब घटकर 11 रह गई है। यह फैसला कंपनी की रणनीति में बदलाव को दर्शाता है, जिसमें अब तेजी से भौगोलिक विस्तार की बजाय ऑपरेशनल दक्षता और लाभ पर जोर दिया जा रहा है।
छोटे बाजारों से बाहर निकलने की रणनीति
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में, DMart Ready ने सात शहरों - जयपुर, सूरत, नासिक, कोल्हापुर, चेन्नई, विजयवाड़ा और रायपुर - से अपना कारोबार समेट लिया। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि इन जगहों से पर्याप्त बिजनेस नहीं मिल रहा था, जिससे वहां के ऑपरेशनल खर्चों को सही ठहराना मुश्किल हो रहा था। इन क्षेत्रों से बाहर निकलकर, कंपनी अपने संसाधनों को उन बड़े शहरों पर केंद्रित करना चाहती है जहां उसका फिजिकल स्टोर नेटवर्क और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से ही मजबूत है।
यह कदम Blinkit, Swiggy Instamart और Zepto जैसे क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) प्लेटफॉर्म्स से मिल रहे तीव्र दबाव का सीधा नतीजा है। इन प्लेटफॉर्म्स ने 10-20 मिनट में किराना डिलीवरी का वादा करके ग्राहकों की उम्मीदों को पूरी तरह बदल दिया है। इसके विपरीत, DMart Ready का मॉडल शेड्यूल्ड डिलीवरी (Scheduled Delivery), पिक-अप पॉइंट (Pick-up Point) और बल्क खरीद (Bulk Purchase) पर आधारित है, जो कंपनी की 'एवरीडे लो प्राइस' (EDLP) रणनीति के अनुरूप है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और कॉम्पिटिशन
लगातार रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद, DMart Ready का ई-कॉमर्स डिवीजन लगातार वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। मार्च 2025 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए, DMart Ready ने ₹3,502.42 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹2,899.20 करोड़ से ज्यादा है। हालांकि, इस डिवीजन का घाटा भी बढ़ा है, जो फाइनेंशियल ईयर 2024 में ₹184.82 करोड़ से बढ़कर ₹247.37 करोड़ हो गया। बिजनेस बढ़ने के साथ-साथ घाटे का यह बढ़ता ट्रेंड मैनेजमेंट को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर रहा है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि छोटे बाजारों से निकलकर कंपनी अपनी यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics) को सुधारने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह अभी भी एक मुश्किल स्थिति में है। बड़े शहर, जो अब DMart Ready का मुख्य फोकस हैं, क्विक कॉमर्स फर्मों के लिए सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी बाजार भी हैं। कंपनी का ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क अभी भी एक मजबूत कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (Competitive Advantage) है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ पर लॉन्ग-टर्म असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह नई रणनीति ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को आकर्षित करने में कितनी सफल होती है, बिना अत्यधिक ग्राहक अधिग्रहण लागत (Customer Acquisition Cost) के।
निवेशकों को ई-कॉमर्स आर्म के मार्जिन में सुधार के संकेतों के लिए कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। मुख्य बात यह होगी कि क्या ऑपरेटिंग शहरों में कमी से आने वाली तिमाहियों में घाटा कम होता है और क्या कंपनी बड़े शहरों में स्पीड पर जोर देने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले अपनी कॉम्पिटिटिव एज (Competitive Edge) बनाए रख पाती है।
