ऑस्ट्रेलिया सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नया कानून पेश किया है। अब कंपनियों को बच्चों को हानिकारक कंटेंट से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम करने होंगे, वरना उन्हें **$7.8 करोड़** (लगभग **₹650 करोड़**) तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
एल्गोरिथम पर नकेल
इस नए ड्राफ्ट कानून का सबसे बड़ा हिस्सा 'My Feed, My Way' पहल है। इसके तहत कंपनियों को यूजर्स को एल्गोरिथम आधारित फीड से बाहर निकलने (opt-out) का विकल्प देना होगा। फिलहाल, Meta Platforms, Alphabet (YouTube की पेरेंट कंपनी), ByteDance (TikTok) और Snap Inc. जैसी दिग्गज कंपनियां अपने एल्गोरिथम का इस्तेमाल कर यूजर्स को ऐप पर ज्यादा देर तक रोके रखती हैं, जिससे उनका एडवरटाइजिंग रेवेन्यू आता है। अगर यूजर्स क्रोनोलॉजिकल फीड चुनते हैं, तो इन कंपनियों का मौजूदा बिजनेस मॉडल बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
सख्त होता रेगुलेटरी माहौल
ऑस्ट्रेलियाई सरकार पहले ही दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा चुकी है। हालांकि, इसके बावजूद माइनर्स के बीच सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम नहीं हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने अब eSafety Commissioner की शक्तियों को और बढ़ा दिया है। अब यह कानून न केवल सोशल मीडिया साइट्स, बल्कि ऑनलाइन गेम्स, ऐप्स और AI-आधारित चैटबॉट्स पर भी लागू होगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता 'कंप्लायंस कॉस्ट' यानी नियमों के पालन में होने वाला खर्च है। कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर को बदलने, एज-वेरिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करने और मॉडरेशन टीम बढ़ाने पर मोटा पैसा खर्च करना होगा। जुर्माने के अलावा, इन कंपनियों पर भविष्य में कानूनी मुकदमे (Litigation) का खतरा भी मंडरा रहा है। ऑस्ट्रेलिया की यह पहल ग्लोबल स्तर पर एक मिसाल बन सकती है, जिससे अन्य देशों में भी टेक कंपनियों के लिए सख्ती बढ़ सकती है।
