ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 'Digital Duty of Care' बिल पेश किया है, जिसका मकसद यूजर्स को एल्गोरिदम फीड पर कंट्रोल देना और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाना है। यह सोशल मीडिया कंपनियों के बिजनेस मॉडल के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
नियम और बदलाव
ऑस्ट्रेलियाई संसद में पेश इस नए बिल का सीधा असर Meta (Facebook और Instagram) और ByteDance (TikTok) जैसी दिग्गज कंपनियों पर पड़ेगा। सरकार का मुख्य फोकस दो मोर्चों पर है: पहली, यूजर्स के पास 'एल्गोरिदम फीड' को बंद करने का विकल्प हो, और दूसरी, नाबालिगों को हानिकारक कंटेंट (जैसे साइबर बुलिंग) से बचाने के लिए सख्त नियम।
बिजनेस मॉडल पर संकट
निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि सोशल मीडिया कंपनियों का पूरा बिजनेस 'एल्गोरिदम-आधारित एंगेजमेंट' पर टिका है। कंपनियां यूजर्स को ऐप पर ज्यादा समय तक रोककर रखने के लिए एल्गोरिदम का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उन्हें विज्ञापन (Ads) से भारी रेवेन्यू मिलता है। अगर एल्गोरिदम फीड को बंद करने का ऑप्शन मिलता है, तो 'टाइम-ऑन-ऐप' घट सकता है, जिसका असर सीधे एडवरटाइजिंग रेवेन्यू और ग्रोथ पर पड़ना तय है।
इसके अलावा, सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को AI-आधारित फिल्टरिंग और कंटेंट मॉडरेशन पर भारी खर्च करना होगा। यह बढ़ता खर्च आने वाले समय में कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
राजनीतिक अनिश्चितता
यह बिल कानून बनेगा या नहीं, अभी इस पर सस्पेंस बना हुआ है। सरकार के पास सीनेट में स्पष्ट बहुमत नहीं है, और विपक्षी दल इसे 'डिजिटल स्पीच' में दखल बताकर विरोध कर रहे हैं। हालांकि, यह कदम दुनिया भर में बढ़ रही उस लहर का हिस्सा है, जिसमें सरकारें Big Tech की मनमानी पर लगाम कसने की कोशिश कर रही हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि ये कंपनियां ग्लोबल स्तर पर अपनी पॉलिसी में क्या बदलाव करती हैं।
