ऑस्ट्रेलिया में टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया बैन का असर बेअसर साबित हो रहा है। यूजर्स नियम तोड़कर प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके बाद सरकार ने अब जुर्माना बढ़ाकर **A$99 मिलियन** करने का बड़ा फैसला लिया है।
नियम तोड़ने पर बढ़ेगी सख्ती
दिसंबर 2025 में लागू हुए इस बैन के बावजूद, 13-15 साल के युवाओं के बीच सोशल मीडिया का इस्तेमाल फिर से पुराने स्तर पर पहुंच गया है। टीनएजर्स VPN और अन्य तरीकों का इस्तेमाल करके एज-वेरिफिकेशन सिस्टम को आसानी से चकमा दे रहे हैं। इस नाकामी से बौखलाई ऑस्ट्रेलियाई सरकार अब नॉन-कंप्लायंस पेनल्टी को दोगुना कर A$99 मिलियन तक ले जाने की तैयारी में है।
टेक कंपनियों पर वित्तीय दबाव
यह मामला अब सिर्फ ऑपरेशनल चुनौती नहीं, बल्कि एक बड़ा फाइनेंशियल रिस्क बन चुका है। Meta जैसी कंपनियां पहले ही ऑस्ट्रेलिया में 7,50,000 से ज्यादा ऐसे अकाउंट्स डिलीट कर चुकी हैं जो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के होने का संदेह था। एज-वेरिफिकेशन टेक्नोलॉजी, डेटा मॉनिटरिंग और लीगल सपोर्ट पर हो रहा भारी खर्च सीधे तौर पर कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर रहा है। Meta, ByteDance और Alphabet जैसी दिग्गजों के लिए चुनौती यह है कि रेगुलेटर्स अब और ज्यादा आक्रामक समाधान मांग रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट पर असर
ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग अब दुनिया भर के देशों के लिए एक टेस्टिंग ग्राउंड बन गया है। यूके, फ्रांस और न्यूजीलैंड जैसे देश इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। अगर इन देशों ने भी ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर सख्त नियम लागू किए, तो ग्लोबल टेक प्लेटफॉर्म्स का कंप्लायंस खर्च कई गुना बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर निवेशकों की कमाई पर पड़ना तय है। अब बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या कंपनियां इन वर्क-अराउंड्स को रोकने में सफल होंगी या उन्हें अपने प्रोडक्ट डिजाइन में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे।
