गगनयान मिशन के एस्ट्रोनॉट प्रशांत नायर ने भारत की नेशनल सिक्योरिटी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जोर दिया है कि सुरक्षा और डेटा की रक्षा के लिए भारत को अपनी खुद की AI तकनीक विकसित करनी होगी।
सुरक्षा के लिए 'AI संप्रभुता' पर जोर
केरल साइबर सुरक्षा समिट 2026 में बोलते हुए, गगनयान मिशन के एस्ट्रोनॉट और इंडियन एयर फोर्स के एयर कमोडोर प्रशांत बालकृष्णन नायर ने 'AI संप्रभुता' (AI Sovereignty) की वकालत की। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब विदेशी AI सिस्टम पर निर्भर नहीं रह सकती, क्योंकि यह भारत के क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ी खामियां पैदा कर सकता है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
आज के दौर में डिजिटल और फिजिकल खतरों के बीच का अंतर खत्म हो गया है। AI का इस्तेमाल जिस तरह से गलत जानकारी फैलाने और साइबर फ्रॉड के लिए हो रहा है, उसे देखते हुए पुराने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल अब नाकाफी साबित हो रहे हैं। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत में साइबर फ्रॉड से हुआ नुकसान ₹19,813 करोड़ तक पहुंच गया है, जो एक बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
टेक सेक्टर और निवेशकों के लिए मायने
सरकार और इंडस्ट्री अब तेजी से स्वदेशी साइबर सिक्योरिटी समाधानों की तरफ बढ़ रहे हैं। इस बदलाव से भारतीय स्टार्टअप्स और उन टेक कंपनियों के लिए बड़े मौके बन सकते हैं जो सुरक्षित AI इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर सकती हैं।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह एक बड़ा ट्रेंड है। आने वाले समय में सरकारी IT बजट का एक बड़ा हिस्सा नेशनल डिजिटल सिक्योरिटी और स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने में खर्च होने की संभावना है। भविष्य में सरकार की नई AI पॉलिसी और डिफेंस बजट में साइबर सिक्योरिटी के लिए आवंटन ही इस सेक्टर की अगली दिशा तय करेंगे।
