अमेरिकी वेल्थटेक फर्म AssetMark ने हैदराबाद में अपना ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) शुरू किया है। इसके जरिए कंपनी **500** प्रोफेशनल्स को नौकरी देगी और अब तीसरे पक्ष (third-party) पर निर्भर रहने के बजाय अपनी टेक्नोलॉजी और AI क्षमताओं को खुद इन-हाउस तैयार करेगी।
अब इन-हाउस होगा टेक्नोलॉजी का काम
AssetMark का यह नया कदम उनके दशकों पुराने बिजनेस मॉडल में एक बड़ा बदलाव है। पहले कंपनी अपने सॉफ्टवेयर और टेक्निकल कामों के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों पर निर्भर थी, लेकिन अब वे सीधे अपने टेक्नोलॉजी रोडमैप और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को कंट्रोल करेंगे। इस फैसिलिटी में लगभग 500 कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे, जो मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाइंट-फेसिंग प्लेटफॉर्म्स पर काम करेंगे।
क्यों बदल रहा है ट्रेंड?
यह कदम भारत के टेक्नोलॉजी लैंडस्केप के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। अब ग्लोबल फाइनेंशियल कंपनियां बाहरी वेंडर के बजाय खुद के ऑपरेशनल हब (GCCs) बनाने को प्राथमिकता दे रही हैं। हालांकि इससे उन भारतीय IT कंपनियों की रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है, जो पहले इन्हें अपनी सेवाएं देती थीं, लेकिन यह भारत में हाई-क्वालिटी इंजीनियरिंग टैलेंट की बढ़ती मांग को भी दर्शाता है।
हैदराबाद क्यों बना केंद्र?
हैदराबाद का चुनाव कंपनी की रणनीति का हिस्सा है। यहाँ का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किलफुल टैलेंट का पूल इसे ग्लोबल कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह बनाता है। इस नए सेंटर का संचालन जोशी अलापार्थी (Joshi Alaparthi) की लीडरशिप में होगा, जो भारतीय ऑपरेशंस को US हेडक्वार्टर के साथ जोड़ेंगे।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
AssetMark फिलहाल एक प्राइवेट कंपनी है (इसे निवेश फर्म GTCR ने खरीदा है), इसलिए इसका स्टॉक मार्केट पर सीधा असर नहीं है। लेकिन, जो निवेशक IT सेक्टर पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा डेटा पॉइंट है कि कैसे कंपनियां आउटसोर्सिंग से हटकर खुद के सेटअप में निवेश कर रही हैं। अब कंपनी के लिए चुनौती इन नए टैलेंट को अपने ग्लोबल वर्कफ्लो के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ने की होगी।
