एशियाई शेयर बाज़ारों में बुधवार को लगभग 2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में भारी बिकवाली के चलते यह गिरावट देखी गई। बढ़ती बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) और तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों को टेक्नोलॉजी शेयरों से दूर सुरक्षित संपत्तियों की ओर धकेल दिया है।
क्या है गिरावट की वजह?
बुधवार को एशियाई शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई। MSCI Asia Pacific Index लगभग 2% लुढ़क गया। इस बिकवाली का मुख्य कारण टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों में आई जोरदार गिरावट रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 6% से ज़्यादा गिर गया, जिससे ट्रेडिंग को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। वहीं, जापान का Nikkei 225 इंडेक्स भी करीब 3% नीचे आ गया।
चिप कंपनियों पर मार
सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर इस गिरावट के केंद्र में रहे। Samsung Electronics और SK Hynix के शेयरों में 7% से 9% तक की गिरावट आई, जबकि जापान की Kioxia Holdings लगभग 10% टूटी। यह गिरावट अमेरिकी शेयर बाज़ार में आई 5% की गिरावट के बाद देखी गई, जो दिखाता है कि अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर की नकारात्मकता कितनी जल्दी वैश्विक बाज़ारों में फैल सकती है।
बॉन्ड यील्ड और तेल की कीमतें बनीं बड़ा कारण
बाज़ार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह वैश्विक बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी है। अमेरिका के 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 19 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि जापान के 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड ने तीन दशक का रिकॉर्ड तोड़ा है। जब सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक अक्सर टेक्नोलॉजी जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ जाते हैं। बढ़ी हुई यील्ड कंपनियों के लिए उधार लेना भी महंगा कर देती है, जो कैपिटल-इंटेंसिव (Capital Intensive) सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चिंता है, क्योंकि यह इंडस्ट्री नई फैक्ट्रियों और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च करती है।
भू-राजनीतिक तनाव का असर
मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव ने स्थिति को और खराब कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं, तेल की कीमतों को $91 प्रति बैरल से ऊपर बनाए हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतें महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकती हैं, जिससे सेंट्रल बैंकों को कीमतें काबू में रखने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। ऊंची ब्याज दरें और महंगाई के इस माहौल में टेक्नोलॉजी शेयरों के लिए कमज़ोर स्थिति पैदा हो जाती है, जो अपनी ग्रोथ के लिए सस्ते फाइनेंस पर निर्भर करते हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
फिलहाल बाज़ार में दिख रही यह अस्थिरता (Volatility) निवेशकों के कम जोखिम वाली संपत्तियों की ओर झुकाव को दर्शाती है। चूंकि भारतीय बाज़ार भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा हैं, इसलिए वैश्विक भावना में बड़े बदलाव अक्सर स्थानीय आईटी (IT) और मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) सेक्टरों में ट्रेडिंग को प्रभावित कर सकते हैं। अगले कुछ दिनों में सबसे महत्वपूर्ण ट्रेंड यह देखना होगा कि बॉन्ड यील्ड स्थिर होती है या नहीं। यदि यील्ड बढ़ती रहती है, तो यह टेक वैल्यूएशन (Tech Valuations) और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार योजनाओं पर और दबाव का संकेत दे सकती है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) की किसी भी नई टिप्पणी पर भी नज़र रखेंगे, क्योंकि ट्रेडर्स अब ब्याज दरों में और वृद्धि की संभावना को भी देख रहे हैं, जिससे वैश्विक बाज़ार सतर्क बने रह सकते हैं।
