Apple की लीडरशिप ने नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को सीमित करने वाले ऑस्ट्रेलिया के सख्त नियमों का समर्थन किया है। यह कदम टेक जगत में बढ़ रही सरकारी सख्ती और Apple के प्राइवेसी-केंद्रित बिजनेस मॉडल की अलग पहचान को दर्शाता है।
नियम और नई रणनीति
हाल ही में क्यूपर्टिनो में हुई एक मीटिंग के दौरान, Apple के शीर्ष नेतृत्व ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर ऑस्ट्रेलिया की पाबंदियों के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया। Apple के CEO Tim Cook और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री Anthony Albanese के बीच हुई इस चर्चा का मुख्य केंद्र ऑनलाइन सुरक्षा और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी थी।
ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर में एक कानून पास किया है जो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को प्रभावी ढंग से रोकता है। अब सरकार एल्गोरिदम फीड को कंट्रोल करने वाले फीचर्स पर भी काम कर रही है, ताकि हानिकारक कंटेंट से बच्चों को बचाया जा सके।
Apple का बिजनेस मॉडल कैसे अलग है?
यह समर्थन साफ करता है कि Apple की रणनीति सोशल मीडिया कंपनियों जैसे Meta या Alphabet से कितनी अलग है। जहाँ बाकी कंपनियां विज्ञापन (Ads) और यूजर इंगेजमेंट से कमाई करती हैं, वहीं Apple का मुख्य रेवेन्यू हार्डवेयर जैसे iPhone और प्रीमियम सर्विसेज से आता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर सख्ती का सीधा असर Apple के मुनाफे पर नहीं पड़ता। उलटे, 'प्राइवेसी-फर्स्ट' ब्रांड इमेज कंपनी की मार्केट वैल्यू बढ़ाती है।
चुनौतियां अब भी बरकरार
हालांकि, रेगुलेटरी सपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि Apple सरकार की जांच के दायरे से बाहर है। कंपनी अभी भी यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका में अपने App Store को लेकर एंटीट्रस्ट जांच का सामना कर रही है, जहां सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूशन और पेमेंट कंट्रोल पर सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) की गवर्निंग को लेकर भी बहस जारी है। जहां सिलिकॉन वैली का एक हिस्सा कम दखल की वकालत कर रहा है, वहीं Apple 'प्राइवेसी-प्रिजर्विंग' AI इंटीग्रेशन पर ध्यान दे रही है, जो सरकारी मानकों के अधिक करीब है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे ग्लोबल स्तर पर बदल रहे इन कानूनों पर नजर रखें, क्योंकि आने वाले समय में अनुपालन (Compliance) का खर्च टेक कंपनियों की बॉटम-लाइन को प्रभावित कर सकता है।
