Apple के इंडिया में iPhone की ग्रोथ को लेकर बड़ी खबर आई है। पहले जहां डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद थी, वहीं अब इसे घटाकर सिंगल-डिजिट कर दिया गया है। मेमोरी चिप्स के बढ़ते दाम और रुपये में गिरावट के चलते कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ सकता है।
क्या हुआ है?
भारत में Apple की ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। मार्केट एनालिस्ट्स ने देश में iPhone शिपमेंट ग्रोथ के अनुमानों को घटा दिया है। अब जहां पहले डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद थी, वहीं इस साल फ्लैट से लेकर सिंगल-डिजिट ग्रोथ का अनुमान है। इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की बढ़ती लागत और डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री इस वक्त कंपोनेंट की कीमतों में भारी उछाल झेल रही है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च तिमाही में मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की कीमतें लगभग 93-98% तक बढ़ी थीं, और जून तिमाही में भी इनके 58-63% तक बढ़ने का अनुमान है। Apple के CEO टिम कुक ने भी माना है कि यह स्थिति अब अनसस्टेनेबल (unsustainable) हो गई है, जिसका मतलब है कि प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना तय है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों के लिए, यह घरेलू शिपमेंट ग्रोथ में कमी एक बड़ा बदलाव है। हालांकि, तस्वीर अभी भी मिली-जुली है। जहां आम ग्राहकों के लिए नए मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी और फाइनेंसिंग स्कीम्स में कमी से वॉल्यूम ग्रोथ पर असर पड़ सकता है, वहीं हाई-एंड सेगमेंट में डिमांड अभी भी मजबूत है। Apple के प्रीमियम Pro मॉडल्स, जो भारत में कंपनी के कुल वॉल्यूम का करीब 30% हिस्सा हैं, के खरीदार आमतौर पर कीमतों के प्रति कम संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा, भले ही घरेलू बिक्री में कमी आए, कंपनी का एक्सपोर्ट प्रदर्शन एक अलग तस्वीर दिखाता है। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स के तहत, भारत से Apple के iPhone एक्सपोर्ट्स ने FY26 में रिकॉर्ड ₹2 ट्रिलियन का आंकड़ा पार किया है।
affordability और डिमांड का रिस्क
भारतीय स्मार्टफोन मार्केट ऐतिहासिक रूप से प्राइस-सेंसिटिव (price-sensitive) रहा है, जहां फेस्टिव सीजन में डिस्काउंट और फाइनेंसिंग बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स को चिंता है कि बढ़ती लागत के दबाव के चलते इस साल फेस्टिव ऑफर्स उतने आकर्षक नहीं हो सकते। अगर नए मॉडल्स, जैसे कि आने वाली iPhone 18 सीरीज, की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो ग्राहक अपने अपग्रेड साइकिल को टाल सकते हैं या लेटेस्ट फ्लैगशिप डिवाइस के बजाय पुराने, सस्ते बेस मॉडल्स चुन सकते हैं।
सेक्टर और कम्पटीशन का दबाव
पूरा स्मार्टफोन सेक्टर भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। 2026 तक इंडस्ट्री के एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है, ऐसे में कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए प्रीमियम सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। Apple भी इसी प्रीमियमाइजेशन की हदें परख रहा है। चुनौती यह है कि बढ़ती कंपोनेंट लागत को ग्राहकों पर कितना पास किया जाए, जबकि ब्रांड की वैल्यू और चाहत को भी बनाए रखना है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कुछ अहम चीजों पर नजर रखनी चाहिए। पहला, फेस्टिव सीजन की बिक्री यह बताएगी कि कंज्यूमर सेंटिमेंट कैसा है और मौजूदा प्राइसिंग स्ट्रैटेजी कितनी कारगर है। दूसरा, सप्लाई चेन लागत और कीमतों या फाइनेंसिंग में किसी भी बदलाव पर मैनेजमेंट की कमेंट्री महत्वपूर्ण होगी। अंत में, भारत से iPhone एक्सपोर्ट्स की रफ्तार और लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर अपडेट्स निवेशकों को देश में कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजिक पोजीशन समझने में मदद कर सकते हैं।
