Apple का पहला फोल्डेबल फोन, iPhone Duo मार्केट में आते ही आउट ऑफ स्टॉक हो गया है। **$1,999** के प्रीमियम दाम पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के बावजूद, चीन में मैन्युफैक्चरिंग बॉटलनेक्स के कारण सप्लाई सीमित है।
Apple ने अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन, iPhone Duo लॉन्च किया है, जो दुनिया भर के बाजारों में आते ही बिक गया है। कंपनी का $1,999 का शुरुआती प्राइस टैग यह साबित करता है कि दिग्गज टेक कंपनी अब अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट पर बड़ा दांव लगा रही है। रिटेल स्टोर्स के बाहर लगी लंबी कतारें बताती हैं कि ग्राहकों में इस नए फॉर्म-फैक्टर को लेकर भारी क्रेज है।
प्रीमियम प्राइसिंग और डिमांड
करीब $2,000 की कीमत तय करना यह दर्शाता है कि Apple का टारगेट अब हाई-एंड कंज्यूमर्स हैं। हालांकि शुरुआती डिमांड काफी ज्यादा है, लेकिन कंपनी की वित्तीय सफलता इस बात पर टिकी है कि क्या वह इस मोमेंटम को बरकरार रख पाएगी। निवेशकों को अब आने वाले फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह स्ट्रैटेजी कंपनी के रेवेन्यू में इजाफा करती है और क्या यह हिंज (hinge) और डिस्प्ले जैसी महंगी टेक्नोलॉजी की लागत को कवर कर पाएगी।
मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई रिस्क
साधारण iPhone मॉडल के विपरीत, जिनका प्रोडक्शन नेटवर्क भारत जैसे देशों तक फैला है, iPhone Duo का उत्पादन फिलहाल चीन की चुनिंदा साइट्स तक सीमित है। इस वजह से सप्लाई और डिमांड के बीच बड़ा असंतुलन पैदा हो गया है। कॉम्प्लेक्स डिस्प्ले और हिंज टेक्नोलॉजी के कारण प्रोडक्शन बढ़ाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। आलम यह है कि नए ऑर्डर्स की डिलीवरी 2027 की शुरुआत तक के लिए शिफ्ट हो गई है। यह निवेशकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि सीमित इन्वेंट्री सीधे तौर पर बिक्री की क्षमता को प्रभावित करती है।
बाजार में मुकाबला
फोल्डेबल स्मार्टफोन सेगमेंट में Samsung, Xiaomi और Oppo जैसे दिग्गज पहले से मौजूद हैं। मेमोरी और स्पेशलाइज्ड मटेरियल की बढ़ती कीमतों के कारण ये कंपनियां भी अपने दाम बढ़ा रही हैं। Apple के लिए चुनौती सिर्फ डिजाइन में बेहतर होना ही नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की उन जटिलताओं को पार करना है जो अक्सर नई टेक्नोलॉजी के लॉन्च के दौरान सामने आती हैं। फिलहाल, प्रोडक्शन कैपेसिटी और मैन्युफैक्चरिंग डायवर्सिफिकेशन ही वह की-फैक्टर हैं जिन पर मार्केट की निगाहें टिकी रहेंगी।
