Apple ने अपने macOS के 'Full Disk Access' पर सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं, ताकि AI एजेंटों के जरिए यूजर्स के डेटा को सुरक्षित रखा जा सके। यह तकनीकी बदलाव ऐसे समय आया है जब ब्रोकरेज फर्मों ने मेमोरी लागत बढ़ने की चिंता के बीच स्टॉक पर अपना नजरिया बदला है। अब निवेशकों की नजर **29 अक्टूबर** को आने वाले फाइनेंशियल Q4 नतीजों पर टिकी है।
डेटा सुरक्षा को लेकर Apple का सख्त रुख
Apple अपने macOS में 'Full Disk Access' के लिए अब पहले से कहीं ज्यादा कड़े नियम लागू कर रहा है। अभी तक कई थर्ड-पार्टी ऐप्स के पास ईमेल, मैसेज और ब्राउजिंग हिस्ट्री तक पहुंच होती थी, लेकिन अब कंपनी इसे सीमित कर रही है। मकसद साफ है—ऑटोनॉमस AI एजेंट यूजर्स की अनुमति के बिना उनकी निजी जानकारी तक न पहुंच सकें। कंपनी यह संदेश दे रही है कि उसके इकोसिस्टम में ग्राहकों की प्राइवेसी किसी भी तरह के डिजिटल ऑटोनॉमी से कहीं ऊपर है।
ब्रोकरेज का क्या है कहना?
इस बीच, शेयर बाजार के जानकार कंपनी की कॉस्टिंग को लेकर सतर्क हैं। 2 अक्टूबर को दिग्गज ब्रोकरेज हाउस Morgan Stanley ने Apple के शेयर का टारगेट प्राइस $360 से घटाकर $355 कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी के हार्डवेयर मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, उन्होंने स्टॉक पर 'Overweight' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन शॉर्ट टर्म में मुनाफा बढ़ने की सीमित संभावना जताई है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
फिलहाल यह अपडेट सिर्फ एक प्रोडक्ट पॉलिसी में बदलाव है, जिसका किसी भी एक्सचेंज (NSE या BSE) पर सीधा असर नहीं पड़ा है। तकनीकी रूप से देखें तो Apple का शेयर अभी 'कंसोलिडेशन' मोड में है और अपने मुख्य मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है।
अब सबकी नजरें 29 अक्टूबर पर हैं, जब कंपनी अपने फाइनेंशियल Q4 2026 के नतीजे पेश करेगी। मैनेजमेंट इस बात पर क्या कमेंट्री देता है कि बढ़ती मेमोरी लागत का असर प्रॉफिटेबिलिटी पर कितना है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
