Apple ने अपने App Store के गाइडलाइन्स को सख्त कर दिया है। अब AI-आधारित 'न्यूडिफिकेशन' सॉफ्टवेयर और 'बेट-एंड-स्विच' जैसी धोखाधड़ी करने वाले ऐप्स पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
Apple ने अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को पुख्ता करते हुए डेवलपर्स के लिए सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं। अब वे ऐप्स जो AI का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति की फोटो को 'न्यूड' (नग्न) बनाने का काम करते हैं या जो 'बेट-एंड-स्विच' (धोखाधड़ी वाली) रणनीति अपनाते हैं, उन्हें बैन कर दिया गया है। ऐसे ऐप्स अक्सर अप्रूवल के वक्त खुद को सुरक्षित बताते हैं, लेकिन बाद में हानिकारक फीचर्स खोल देते हैं। अब डेवलपर्स को अपने ऐप्स में एक्टिव फिल्टरिंग और रिपोर्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।
रेगुलेटरी और सेफ्टी का दबाव
यह नीतिगत बदलाव बड़ी टेक कंपनियों पर बढ़ते रेगुलेटरी दबाव का नतीजा है। सैन फ्रांसिस्को के अधिकारियों समेत कई स्तरों पर यह चिंता जताई गई थी कि ऐसी हानिकारक ऐप्स से टेक प्लेटफॉर्म कमाई कर रहे हैं। 'Tech Transparency Project' की रिपोर्ट्स ने भी खुलासा किया था कि ये ऐप्स माइनर्स (नाबालिगों) तक पहुंच रहे थे, जिससे कंपनी की साख और कानूनी दिक्कतों का खतरा बढ़ गया था।
इकोसिस्टम और निवेशकों के लिए मायने
निवेशकों के लिए Apple का सर्विस रेवेन्यू सीधे तौर पर ऐप स्टोर के भरोसे पर टिका है। कंपनी ने खुद खुलासा किया है कि पिछले साल धोखाधड़ी रोकने के लिए उसने 1,50,000 से ज्यादा ऐप्स को ब्लॉक किया और 1,93,000 डेवलपर अकाउंट्स को डिलीट किया।
यह कदम धोखाधड़ी से जुड़ी ऑपरेशनल लागत को कम करने और 'वॉल्ड गार्डन' (Walled Garden) अप्रोच की ब्रांड वैल्यू को बचाने की कोशिश है। Google Play Store जैसे प्रतिस्पर्धी भी इन चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ये नए मॉडरेशन टूल्स बिना किसी क्रिएटिव इनोवेशन को रोके, हानिकारक ऐप्स को प्रभावी ढंग से हटा पाएंगे या नहीं।
