Apple ने Q4 2026 में **$114.5 बिलियन** का रेवेन्यू दर्ज किया है, लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च के चलते शेयर पर दबाव बना हुआ है। अब कंपनी गिरते ऐप स्टोर कमीशन और रेगुलेटरी चुनौतियों से निपटने के लिए थर्ड-पार्टी AI ऐप्स के जरिए नई कमाई की तैयारी कर रही है।
Apple ने अपनी सर्विसेज स्ट्रेटेजी में एक बड़ा बदलाव किया है, जिसका मुख्य मकसद ऐप स्टोर के सुस्त पड़ते बिजनेस की भरपाई करना है। कंपनी ने हाल ही में वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में $114.5 बिलियन का रेवेन्यू हासिल किया, जो सालाना आधार पर 12% की बढ़त है। अब टेक जायंट का पूरा फोकस थर्ड-पार्टी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एप्लीकेशन्स को अपने ईकोसिस्टम में जोड़कर कमाई करने पर है।\n\n### मैनेजमेंट का नया दांव\n\nApple के CFO केवन पारेख ने साफ कर दिया है कि कंपनी अब अपने प्लेटफॉर्म पर थर्ड-पार्टी AI ऐप्स को मोनेटाइज करने की राह तलाश रही है। निवेशकों के लिए यह बड़ा बदलाव है क्योंकि अब तक कंपनी का बड़ा हिस्सा ऐप स्टोर की कमीशन फीस पर निर्भर था। अमेरिका में कानूनी पेचीदगियों और एंटीट्रस्ट दबाव के कारण पहले ही कमीशन रेवेन्यू में 18% की गिरावट आ चुकी है, जिसने कंपनी को अपना मॉडल बदलने पर मजबूर किया है।\n\n### लागत का दबाव और बाजार की प्रतिक्रिया\n\nहालांकि कंपनी ने दिसंबर तिमाही के लिए 7% से 10% तक रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रखा है, लेकिन बाजार ने इसे सावधानी से लिया है। मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च के चलते Apple के शेयर में 3% से 4% तक की गिरावट देखी गई। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों तक ग्रॉस मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।\n\n### रेगुलेटरी और भविष्य की चुनौतियां\n\nयह ट्रांजिशन रिस्क-फ्री नहीं है। दुनिया भर की एंटीट्रस्ट अथॉरिटीज Apple की ऐप मार्केटप्लेस पर पकड़ पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। ऐसे में AI एजेंट्स से कमाई का नया मॉडल रेगुलेटर की सख्ती का सामना कर सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कंपनी चिप्स की बढ़ती कीमतों के बीच अपने मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती है और AI पार्टनरशिप से असल में कितना मुनाफा जोड़ पाती है।
