Apple अगले साल अक्टूबर तक भारत में अपनी पेमेंट सर्विस Apple Pay लॉन्च करने की तैयारी में है। हालांकि, शुरुआत में यह UPI (Unified Payments Interface) को सपोर्ट नहीं करेगा, बल्कि टोकनाइज्ड क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर फोकस करेगा। कंपनी HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसे बड़े बैंकों के साथ पार्टनरशिप कर रही है।
Apple Pay की भारत में दस्तक!
Apple जल्द ही भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस Apple Pay लॉन्च कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सेवा अक्टूबर 2026 तक भारतीय बाजार में आ सकती है। खास बात यह है कि शुरुआत में Apple Pay, देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले UPI (Unified Payments Interface) को सपोर्ट नहीं करेगा। इसके बजाय, कंपनी कांटेक्टलेस कार्ड पेमेंट पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें टोकनाइज्ड क्रेडिट और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल होगा।
प्रमुख बैंकों के साथ पार्टनरशिप
Apple ने इस सर्विस को लॉन्च करने के लिए भारत के बड़े बैंकों जैसे HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank के साथ बातचीत तेज कर दी है। इन बैंकों की भागीदारी Apple Pay को फंक्शनल बनाने के लिए बहुत ज़रूरी है। इन बैंकों के लिए Apple के साथ जुड़ना प्रीमियम ग्राहकों के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करने का एक मौका है, जो iPhone और Apple Watch जैसे डिवाइस इस्तेमाल करते हैं।
UPI का मुकाबला और फीस मॉडल
भारत में UPI पेमेंट का एक प्रमुख जरिया बन चुका है, जहां QR कोड के जरिए तुरंत पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं। UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शून्य है, यानी व्यापारियों के लिए पेमेंट स्वीकार करना मुफ्त है। इसके विपरीत, Apple Pay में आमतौर पर ट्रांजैक्शन फीस लगती है, जो कार्ड जारी करने वालों से 0.15% से 0.20% के बीच हो सकती है। यह लागत का अंतर Apple के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर ऐसे बाजार में जहां मुफ्त और तेज डिजिटल पेमेंट का चलन है।
तकनीकी और रेगुलेटरी चुनौतियां
भारत के पेमेंट सिस्टम के साथ पूरी तरह से इंटीग्रेट होने से पहले Apple को कई तकनीकी बाधाओं को दूर करना होगा। कंपनी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ इंटीग्रेशन को लेकर बातचीत कर रही है। एक बड़ी रुकावट Apple के डिवाइस-लेवल बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (जैसे Face ID और Touch ID) को भारत के पहचान सत्यापन फ्रेमवर्क के साथ अलाइन करना है।
निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Apple Pay में UPI इंटीग्रेशन कब तक होता है और क्या यह केवल कार्ड-आधारित सर्विस के साथ भारतीय बाजार में अपनी जगह बना पाता है, जहां QR-आधारित पेमेंट का बोलबाला है। NPCI से रेगुलेटरी अप्रूवल और पार्टनर बैंकों के साथ हुए समझौते की शर्तें भी भविष्य में इस सर्विस के विकास की दिशा तय करेंगी।
