Apple Operations India ने FY26 में **₹1,400 करोड़** का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया है, जो FY25 के **₹318 करोड़** के मुकाबले बहुत ज्यादा है। कंपनी अब मैन्युफैक्चरिंग के अलावा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर फोकस बढ़ाकर भारत को अपना ग्लोबल इंजीनियरिंग हब बनाने की तैयारी में है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में जबरदस्त तेजी
Apple Operations India की वित्तीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट FY25 के ₹28 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹103 करोड़ पर पहुंच गया है। इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ी वजह नया 'सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट' सेगमेंट है, जिसने अकेले ₹650 करोड़ का योगदान दिया है। यह दिखाता है कि एप्पल अब केवल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में हाई-वैल्यू टेक्निकल काम को तेजी से बढ़ा रहा है।
IT सेक्टर के लिए संकेत?
मार्केट एनालिस्ट्स की नजर इस बात पर है कि कैसे बड़ी ग्लोबल कंपनियां अब अपना इन-हाउस इंजीनियरिंग सेटअप तैयार कर रही हैं। इससे तीसरी पार्टी IT सर्विस प्रोवाइडर्स के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ग्लोबल कंपनियां बाहरी आउटसोर्सिंग के बजाय अपनी भारतीय यूनिट्स को ही प्राथमिकता देने लगी हैं।
रिस्क और ध्यान रखने वाली बातें
निवेशकों को इस मॉडल के कुछ जरूरी पहलुओं पर नजर रखनी चाहिए:
- ट्रांसफर प्राइसिंग (Transfer Pricing): कंपनी का लगभग 97% रेवेन्यू ग्लोबल एंटिटीज से आता है, इसलिए टैक्स अथॉरिटीज की नजर इस पर बनी रहती है।
- मार्जिन प्रेशर: कंपनी को भविष्य में अपने सॉफ्टवेयर वर्कफोर्स को स्केल करते समय मार्जिन को मेंटेन रखने की चुनौती होगी।
अगले कुछ सालों में एप्पल का यह कदम भारतीय आईटी टैलेंट और ग्लोबल ऑपरेशंस के बीच एक नए तालमेल की शुरुआत कर सकता है।
