Apple ने यूरोपीय यूनियन के एंटीट्रस्ट दबाव के बाद अपने 'App Tracking Transparency' नियमों में ढील देने का फैसला किया है। अब डेवलपर्स ज्यादा आसान भाषा का इस्तेमाल कर सकेंगे और उपयोगकर्ताओं से दोबारा अनुमति मांगने का विकल्प भी होगा, जिससे विज्ञापन आधारित कंपनियों को फायदा हो सकता है।
नियमों में हुआ क्या बदलाव?
अब तक Apple का सिस्टम काफी सख्त था, लेकिन यूरोपीय देशों जैसे जर्मनी, फ्रांस, इटली, रोमानिया और पोलैंड में चल रहे एंटीट्रस्ट विवादों के कारण कंपनी को झुकना पड़ा है। अब डेवलपर्स को अनिवार्य रूप से पुरानी सख्त 'ट्रैक' शब्दावली का उपयोग नहीं करना होगा। इसकी जगह वे अधिक सरल और न्यूट्रल भाषा का उपयोग कर पाएंगे, जैसे कि 'Allow' या 'Reject'। इसके अलावा, डेवलपर्स अब यूजर के पहले फैसले के 1 साल बाद फिर से परमिशन मांग सकेंगे।
एड-टेक कंपनियों पर क्या होगा असर?
यह बदलाव उन कंपनियों के लिए बड़ी खबर है जो टारगेटेड विज्ञापन (Targeted Ads) पर निर्भर हैं। जब Apple ने 2021 में अपना सख्त ATT फ्रेमवर्क लागू किया था, तो उसका सीधा असर Meta Platforms जैसी दिग्गज कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ा था। लोग डेटा शेयर करने के लिए 'Opt-out' ज्यादा करने लगे थे, जिससे विज्ञापनदाताओं के लिए मुश्किलें बढ़ गई थीं।
क्या प्राइवेसी पूरी तरह खत्म हो गई?
ऐसा नहीं है। Apple का कहना है कि यह बदलाव उसके प्राइवेसी स्टैंड को खत्म नहीं करता, बल्कि यह 'Digital Markets Act' (DMA) की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया है। अभी भी ऐप्स को किसी भी तरह की ट्रैकिंग से पहले यूजर की अनुमति लेनी अनिवार्य है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या इन बदलावों से विज्ञापन रेवेन्यू में सुधार आता है और क्या अन्य देश भी इसी तरह की मांगें उठाएंगे।
