Apple Inc. ने भारत में फाइनेंशियल ईयर 2026 (मार्च 2026 में समाप्त) के लिए **$10 बिलियन** यानी करीब **₹83,000 करोड़** का सालाना सेल्स रिकॉर्ड पार कर लिया है। कंपनी ने डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल की है।
भारत में Apple की रिकॉर्ड तोड़ कमाई
Apple Inc. ने भारत में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी का सालाना सेल्स $10 बिलियन के आंकड़े को पार कर गया है, जो कि भारतीय रुपये में करीब ₹83,000 करोड़ होता है। यह फाइनेंशियल ईयर 2026 (मार्च 2026 में समाप्त) के लिए दर्ज किया गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का रेवेन्यू करीब $9 बिलियन था, जो इस बार डबल-डिजिट प्रतिशत की ग्रोथ दिखाता है। यह सफलता भारत में Apple के बढ़ते प्रभाव और खासतौर पर iPhone की जबरदस्त डिमांड को दर्शाती है।
मैन्युफैक्चरिंग हब बनता भारत
घरेलू बिक्री के अलावा, Apple के लिए भारत सप्लाई चेन और प्रोडक्शन के मामले में भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। वर्तमान में, दुनिया भर में बनने वाले हर चार iPhone में से लगभग एक iPhone भारत में ही तैयार होता है। इस कदम से Apple को चीन पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। भारत में अब Apple के पांच iPhone मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चालू हैं, जिससे यह देश टेक दिग्गज के ग्लोबल सप्लाई स्ट्रैटेजी का अहम केंद्र बन गया है। यह लोकल प्रोडक्शन कैपेसिटी जियो-पॉलिटिकल जोखिमों को कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए तैयार की गई है।
रेगुलेटरी और मार्केट की चुनौतियाँ
हालांकि ग्रोथ अच्छी है, लेकिन निवेशकों को कुछ चुनौतियों पर भी ध्यान देना चाहिए। Apple भारत में रेगुलेटरी जांच के दायरे में है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ऐप स्टोर की प्रैक्टिस को लेकर एंटीट्रस्ट जांच कर रहा है। अगर इन जांचों के कारण कंपनी के बिजनेस मॉडल या फीस स्ट्रक्चर में कोई बदलाव होता है, तो इसका असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, Apple प्रोडक्ट्स के प्रीमियम होने के कारण भारत में मार्केट में पैठ बनाने में मुश्किलें हैं। ऊंचे लोकल टैक्स और इम्पोर्ट ड्यूटी की वजह से रिटेल कीमतें दूसरे देशों के मुकाबले काफी ज्यादा हो जाती हैं। यह प्राइसिंग स्ट्रक्चर उन ग्राहकों के लिए एक बाधा है जो कीमत को लेकर ज्यादा संवेदनशील हैं, खासकर ऐसे बाजार में जहां सस्ते विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं।
ऑपरेशनल जोखिम भी एक चिंता का विषय है। जैसे-जैसे कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे पार्टनर्स के साथ मिलकर अपना मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट बढ़ा रही है, प्रोडक्ट की गोपनीयता बनाए रखना और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स को मैनेज करना महत्वपूर्ण है। इन मैन्युफैक्चरिंग साइट्स पर किसी भी तरह की रुकावट से ग्लोबल प्रोडक्ट लॉन्च और इन्वेंट्री पर असर पड़ सकता है।
भविष्य का अनुमान
आगे चलकर, निवेशक यह देखेंगे कि कंपनी भारत में अपनी आक्रामक विस्तार योजना को इन रेगुलेटरी और ऑपरेशनल चुनौतियों के साथ कैसे संतुलित करती है। एंटीट्रस्ट कार्यवाही के नतीजे, करेंसी में उतार-चढ़ाव का कीमतों पर असर, और क्या कंपनी डबल-डिजिट ग्रोथ बनाए रखते हुए अपने मुनाफे को बनाए रख पाएगी, ये कुछ मुख्य बातें होंगी जिन पर नजर रखी जाएगी। साथ ही, डिमांड की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या Apple भारतीय उपभोक्ताओं के एक बड़े वर्ग के लिए अपने इकोसिस्टम को और अधिक सुलभ बना पाता है।
