Apple अब भारत में केवल iPhone असेंबली तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनी ने AI और मशीन लर्निंग के लिए नई हायरिंग शुरू की है, जिससे भारत उसके ग्लोबल R&D इंजन का हिस्सा बन जाएगा।
भारत में बदली Apple की रणनीति
Apple का भारतीय परिचालन अब नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। कंपनी अब केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास का एक प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है। जुलाई और अगस्त 2026 में हुई हालिया भर्तियों से साफ है कि कंपनी अब डेटा इंजीनियरिंग और 'एजेंटिक सिस्टम्स' (Autonomous systems) के लिए एक्सपर्ट्स की तलाश कर रही है।
प्रोडक्शन का बढ़ा दबदबा
भारत का महत्व Apple के ग्लोबल सप्लाई चेन में तेजी से बढ़ा है। अनुमान है कि साल 2026 के अंत तक दुनिया भर में बनने वाले कुल iPhone का 26% भारत में तैयार होगा। अब इस हार्डवेयर ग्रोथ के साथ-साथ सॉफ्टवेयर और रिसर्च क्षमताओं का विस्तार करके कंपनी यहां एक मजबूत इकोसिस्टम बना रही है।
आर्थिक स्थिति और लीडरशिप में बदलाव
आर्थिक मोर्चे पर कंपनी मजबूत बनी हुई है। कंपनी ने फिस्कल Q3 2026 में $109.4 बिलियन का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 16% ज्यादा है। इसी बीच कंपनी के टॉप मैनेजमेंट में भी बड़ा बदलाव आया है, जहां John Ternus ने CEO का पद संभाला है और Tim Cook अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे।
नियामक चुनौती (Regulatory Hurdles)
इतनी बड़ी विस्तार योजनाओं के बावजूद Apple के सामने भारतीय बाजार में चुनौतियां कम नहीं हैं। Competition Commission of India (CCI) की ओर से कंपनी के 'App Store' प्रैक्टिस को लेकर एंटीट्रस्ट जांच चल रही है। Apple ने जांच में सहयोग के लिए डेटा साझा करने पर सहमति जताई है, लेकिन इस मामले का नतीजा कंपनी के डिजिटल सर्विस बिजनेस के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
