Apple ने जर्मनी के बुंडेसटाग (Bundestag) सदस्यों और सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि उनके डिवाइस 'मर्सिनरी स्पाईवेयर' का निशाना बन सकते हैं। 29 अक्टूबर से जारी इन अलर्ट्स के बाद, सुरक्षा एजेंसियों ने अधिकारियों को अपने फोन को 'कॉम्प्रोमाइज्ड' मानकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
अलर्ट का दायरा और सरकारी प्रतिक्रिया
Apple की ओर से ये चेतावनी 29 अक्टूबर, 2026 से मिलनी शुरू हुई है। इस खतरे की चपेट में न केवल सरकारी अधिकारी आए हैं, बल्कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ एशिया दौरे पर गए पत्रकार और स्टाफ सदस्य भी शामिल हैं। जर्मनी की फेडरल ऑफिस फॉर इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी (BSI) ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। डिजिटल अफेयर्स मिनिस्टर कार्सटन वाइल्डबर्गर ने स्पष्ट किया है कि सरकार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। BSI ने स्पष्ट सलाह दी है कि जिन भी अधिकारियों को अलर्ट मिला है, वे यह मानकर चलें कि उनका डिवाइस सुरक्षित नहीं है।
जीरो-क्लिक (Zero-Click) हमलों का डर
इस स्पाईवेयर की सबसे बड़ी खूबी इसके 'जीरो-क्लिक' होने में है। इसका मतलब यह है कि इसे इंस्टॉल करने के लिए यूजर को किसी लिंक पर क्लिक करने या किसी फाइल को खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। एक बार डिवाइस में घुसपैठ होने के बाद, हमलावर प्राइवेट मैसेज पढ़ने, लोकेशन ट्रैक करने और यहां तक कि माइक्रोफोन या कैमरे को रिमोटली एक्टिवेट करने में भी सक्षम हो सकते हैं।
डेटा सुरक्षा और बिजनेस पर असर
यह घटना प्राइवेट सर्विलांस सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के 'स्पाइवेयर-एज-अ-सर्विस' मॉडल पर फिर से सवाल उठाती है। निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह घटना हाई-एंड सिक्योरिटी फीचर्स की बढ़ती मांग को दर्शाती है। Apple अपने क्लाइंट्स का भरोसा बनाए रखने के लिए 'Lockdown Mode' जैसे फीचर्स पर जोर दे रहा है, जो टारगेटेड साइबर हमलों के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करते हैं।
फिलहाल, इस हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जांच जारी है कि क्या कोई गोपनीय जानकारी लीक हुई है या नहीं।
