AI कंपनी Anthropic ने अपनी हायरिंग पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब जूनियर पदों पर भर्ती घटाकर अनुभवी प्रोफेशनल्स पर जोर दे रही है, क्योंकि काम का स्वरूप 'क्रिएशन' से बदलकर 'AI ओवरसाइट' (निगरानी) हो गया है।
हायरिंग में बड़ा बदलाव
Anthropic ने हाल ही में अपने वर्कफोर्स में अहम बदलाव किए हैं। कंपनी अब एंट्री-लेवल डेवलपर्स के बजाय उन लोगों को प्राथमिकता दे रही है जो एडवांस AI मॉडल्स को मैनेज कर सकें। डेटा के मुताबिक, कंपनी के टेक्निकल डिपार्टमेंट्स में जूनियर कर्मचारियों की हिस्सेदारी 21% से गिरकर 14% रह गई है। नई भर्तियों में तो यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है, जो 27% से फिसलकर महज 9% पर आ गया है। इस बदलाव से कंपनी के लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल खर्च में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है, क्योंकि सीनियर प्रोफेशनल्स की सैलरी जूनियर के मुकाबले काफी ज्यादा होती है।
'ओवरसाइट बॉटलनेक' की चुनौती
जैसे-जैसे कंपनी अपने 'Claude' मॉडल का इस्तेमाल बढ़ा रही है, काम का तरीका भी बदल गया है। अब कर्मचारी खुद कोड लिखने के बजाय AI द्वारा तैयार किए गए काम की निगरानी (Oversight) ज्यादा कर रहे हैं। कंपनी में टेक्निकल टीम की संख्या कुल वर्कफोर्स का 56% रह गई है, जो पहले 61% थी। इस बदलाव से एक नया संकट पैदा हुआ है जिसे 'ओवरसाइट बॉटलनेक' कहा जा रहा है। हालांकि कोड वॉल्यूम और कॉन्ट्रैक्ट प्रोसेसिंग में तेजी आई है, लेकिन अब उत्पादकता (Productivity) का असली पैमाना इंसानी फैसला बन गया है, जो इस प्रक्रिया की गति को सीमित कर रहा है।
एफिशिएंसी का विरोधाभास
AI के इस्तेमाल का एक बड़ा दावा यह था कि इससे कामकाज आसान होगा और समय बचेगा, लेकिन नतीजा इसके उलट दिख रहा है। Anthropic में प्रति कर्मचारी मीटिंग का समय 20% बढ़ गया है, जबकि टेक्निकल टीमों की मीटिंग्स में 16% का इजाफा हुआ है। कंपनी का कहना है कि ऑटोमेशन के दौर में 'ह्यूमन ट्रस्ट' और 'अकाउंटेबिलिटी' बनाए रखने के लिए ज्यादा समन्वय की जरूरत है।
निवेशकों के लिए संकेत
इन्वेस्टर्स के लिए अब यह देखना अहम होगा कि क्या यह 'हाई-कॉस्ट, हाई-ओवरसाइट' मॉडल भविष्य में स्केलेबल है। क्या कंपनी सीनियर स्टाफ की मदद से बिना खर्च बढ़ाए क्वालिटी बनाए रख पाएगी? आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह बदलाव कंपनी को मुनाफे की ओर ले जाएगा या फिर बढ़ते खर्च फायदे पर भारी पड़ेंगे।
