AI सेक्टर की दिग्गज कंपनी Anthropic अपने अपकमिंग IPO से पहले विवादों में घिर गई है। मिड-अक्टूबर 2026 में आने वाले IPO से पहले कंपनी के अंदर सेफ्टी प्रोटोकॉल को लेकर आंतरिक विरोध शुरू हो गया है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
AI डेवलपर Anthropic के लिए मिड-अक्टूबर 2026 का IPO बेहद अहम है, लेकिन लिस्टिंग से ठीक पहले कंपनी के भीतर मचे घमासान ने मार्केट का ध्यान खींच लिया है। कंपनी ने 1 जून 2026 को ही अमेरिकी SEC में कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट्स फाइल कर दिए थे, लेकिन अब कंपनी के Safeguards Research Team के एक प्रमुख रिसर्चर ने इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी है। उनका आरोप है कि कंपनी तेजी से विकास के चक्कर में सेफ्टी प्रोटोकॉल से समझौता कर रही है।
शानदार फाइनेंशियल परफॉरमेंस
विवादों के बीच कंपनी ने अपने दमदार नतीजों से बाजार को चौंकाया है। Q2 2026 में कंपनी का रेवेन्यू $11.5 बिलियन के पार पहुंच गया है और सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी पहली बार ऑपरेटिंग प्रॉफिट में आ गई है। यह उपलब्धि यह दिखाती है कि कैसे कंपनी अपनी AI टेक्नोलॉजी से जबरदस्त पैसा कमा रही है, जबकि इस सेक्टर की अन्य कंपनियां भारी लागत से जूझ रही हैं। फिलहाल कंपनी एनर्जी और कंप्यूटेशनल पावर पर भारी निवेश कर रही है।
क्या IPO के वैल्युएशन पर पड़ेगा असर?
मार्केट में चर्चा है कि Anthropic का वैल्युएशन $2 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। हालांकि, संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) गवर्नेंस को लेकर काफी सतर्क रहते हैं। ऐसे में सेफ्टी प्रोटोकॉल पर उठ रहे सवाल लिस्टिंग के दौरान वोलाटिलिटी बढ़ा सकते हैं। Anthropic की सीधी टक्कर OpenAI और Google जैसी दिग्गजों से है, जिससे कंपनी के सामने विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है।
भारतीय निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Anthropic अभी एक प्राइवेट कंपनी है और यह NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। इसका IPO अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आएगा। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपने फाइनल प्रॉस्पेक्टस में इन गवर्नेंस सवालों का क्या जवाब देती है और क्या इसका असर IPO की डिमांड पर पड़ता है।
