आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी Anthropic ने बड़ा खुलासा किया है। कंपनी ने उन कोशिशों को नाकाम किया है जिनमें स्टेट-स्पॉन्सर्ड ग्रुप्स उसके AI मॉडल्स का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा और जैविक हथियारों (biological weapons) के लिए करना चाहते थे। यह घटना कंपनी के अक्टूबर में होने वाले IPO से ठीक पहले सामने आई है, जिस पर सुरक्षा चिंताओं के कारण संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
सुरक्षा का घेरा और चुनौतियां
Anthropic ने हाल ही में बताया है कि दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच उसने 9 ऐसे ऑपरेशन्स को रोका है, जिनमें रूस, ईरान और तुर्की जैसे देशों के ग्रुप्स कंपनी की तकनीक का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे। इनका मकसद सोशल मीडिया पर फेक पहचान बनाना और राजनीतिक प्रोपेगेंडा फैलाना था।
इतना ही नहीं, कुछ शरारती तत्वों ने कंपनी के लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स को जैविक हथियारों (Biological Weapons) की रिसर्च के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। इसमें 'चिकनगुनिया' वायरस के लिए रिसर्च ग्रांट जुटाने का ढोंग रचा गया था। हालांकि, कंपनी की आंतरिक सुरक्षा टीम ने समय रहते इन खतरों को भांप लिया और कठोर सुरक्षा गार्डरेल्स लागू कर दिए हैं।
IPO पर क्या होगा असर?
कंपनी के $1 ट्रिलियन के वैल्यूएशन वाले IPO पर इन खबरों का गहरा असर पड़ सकता है। Anthropic ने जून 2026 में IPO के लिए फाइल किया था, लेकिन अब मार्केटिंग रोडशो को अक्टूबर 2026 तक टाल दिया गया है। कंपनी का ध्यान फिलहाल अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर है। साथ ही, कंपनी ने अपने ऑपरेशन्स को रफ्तार देने के लिए $15 बिलियन की रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी की तैयारी की है।
निवेशकों के लिए सबक
कंपनी के भीतर भी सब ठीक नहीं है। हाल ही में रिसर्चर जैकब कॉक्सन (Jacob Coxon) ने सुरक्षा के मुद्दों पर इस्तीफा दे दिया, जिससे मार्केट में बहस छिड़ गई है कि क्या AI कंपनियां मुनाफे की अंधी दौड़ में सुरक्षा के साथ समझौता कर रही हैं। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि क्या कंपनी भरोसे का संकट खत्म कर पाती है और नियामक (regulators) भविष्य में AI पर कितनी सख्त शर्तें लगाते हैं।
