Anthropic AI का बड़ा कदम: अपनी ही AI से कर रही **26%** रिसर्च

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AuthorAditya Rao|Published at:
Anthropic AI का बड़ा कदम: अपनी ही AI से कर रही **26%** रिसर्च

AI क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Anthropic ने खुलासा किया है कि अब उसका Claude AI मॉडल कंपनी की **26%** रिसर्च और डेवलपमेंट का काम खुद संभाल रहा है, जो मार्च में केवल **1%** था।

रिसर्च में AI का दबदबा

इंडिपेंडेंट रिसर्च फर्म Epoch AI के डेटा के मुताबिक, कंपनी अब 'सेल्फ-इम्प्रूविंग' सिस्टम की ओर बढ़ रही है। अगस्त के महीने में, Anthropic ने लगभग 30,000 AI एजेंट्स का इस्तेमाल किया, जिन्होंने एक साथ इंजीनियरिंग और रिसर्च से जुड़े टास्क पूरे किए। यह ऑटोमेशन डेवलपमेंट साइकिल को तो तेज कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही ऑपरेशनल रिस्क भी बढ़ गए हैं।

सुरक्षा और ह्यूमन ओवरसाइट

AI के फैसलों को कंट्रोल करने के लिए Anthropic ने एक ऑटोमेटेड स्क्रीनिंग प्रोसेस तैयार किया है। कंपनी के अनुसार, उनके सिस्टम ने एक महीने में 1 बिलियन से ज्यादा निर्णय लिए, जिसमें से हर 47,000 में से 1 निर्णय को सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत ब्लॉक किया गया। इससे साफ है कि तेजी के साथ-साथ कड़े मानवीय सुपरविजन (Human Oversight) की जरूरत भी बनी हुई है।

सेफ्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती लागत

ग्लोबल टेक सेक्टर के लिए यह एक महत्वपूर्ण इनसाइट है। Anthropic ने बताया कि उनकी कुल कंप्यूटिंग पावर का 6% हिस्सा केवल सेफ्टी और मॉनिटरिंग पर खर्च हो रहा है, जबकि केवल AI-लेड रिसर्च के मामले में यह खर्च बढ़कर 12% हो गया है। जैसे-जैसे कंपनियां ऑटोनॉमस AI की तरफ बढ़ेंगी, 'सेफ्टी कंप्यूट' यानी सुरक्षा जांच के लिए प्रोसेसिंग पावर की मांग और लागत तेजी से बढ़ने वाली है।

भारतीय IT सेक्टर पर असर

यह बदलाव भारतीय IT कंपनियों जैसे Tata Consultancy Services, Infosys और Wipro के लिए भी एक बड़ा सबक है। ये कंपनियां क्लाइंट्स के लिए AI इंटीग्रेशन पर भारी निवेश कर रही हैं। निवेशकों को यह ट्रैक करना होगा कि ये कंपनियां कैसे बढ़ती कंप्यूटिंग लागत और AI द्वारा लिए गए फैसलों की क्वालिटी के बीच संतुलन बनाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.