Andhra Pradesh ने **6.5 गीगावाट** के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को अब प्लानिंग से हटाकर एग्जीक्यूशन मोड में डाल दिया है। राज्य सरकार का लक्ष्य विशाखापत्तनम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हब बनाना है, जहां **70%** रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल अनिवार्य होगा।
प्लानिंग से अब काम की शुरुआत
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी डेटा सेंटर प्रोग्राम को अब कागजों से निकालकर धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने पुष्टि की है कि 6.5 गीगावाट की कंप्यूट कैपेसिटी के लिए एग्रीमेंट्स फाइनल हो चुके हैं। यह कदम विशाखापत्तनम को AI और क्वांटम कंप्यूटिंग के ग्लोबल केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
रिसोर्स मैनेजमेंट और ऊर्जा के लक्ष्य
इतने बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित करने के साथ पानी और बिजली की खपत को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन सेंटर्स के लिए पानी का स्रोत नॉन-एग्रीकल्चरल और नॉन-म्युनिसिपल होगा, ताकि आम जनता की जरूरतों पर असर न पड़े।
सबसे बड़ा फोकस एनर्जी प्रोक्योरमेंट पर है। सरकार ने आदेश दिया है कि कुल खपत की 70% बिजली रिन्यूएबल सोर्स से ही आनी चाहिए। निवेशकों के लिए यह एक 'मॉनिटरेबल' पॉइंट है कि कंपनियां कैसे ग्रीन पावर को सुनिश्चित करती हैं और क्या स्थानीय ग्रिड बिना फॉसिल-फ्यूल बैकअप के इस भारी डिमांड को संभाल पाएगा।
प्रोजेक्ट के माइलस्टोन्स पर नजर
इन प्रोजेक्ट्स की सफलता अब इसके एग्जीक्यूशन टाइमलाइन और सस्टेनेबिलिटी मानकों पर टिकी है। बाजार के जानकारों की नजर अब पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPA) साइन होने और ग्रिड की कैपेसिटी पर बनी रहेगी। यदि साइट डेवलपमेंट में देरी होती है या पानी की सप्लाई में दिक्कत आती है, तो यह कंपनियों के लिए बाधा बन सकता है।
