Andhra Pradesh AI Data Center: ₹31,387 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट स्वीकृत, विशाखापत्तनम बनेगा डिजिटल हब!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Andhra Pradesh AI Data Center: ₹31,387 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट स्वीकृत, विशाखापत्तनम बनेगा डिजिटल हब!

आंध्र प्रदेश सरकार ने विशाखापत्तनम में **₹31,387 करोड़** की लागत से **512 MW** का ग्रीन AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। AM Intelligence Labs के नेतृत्व वाला यह प्रोजेक्ट **28 महीने** में पूरा होना है, जो राज्य को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

₹31,387 करोड़ का बड़ा निवेश

आंध्र प्रदेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर विशाखापत्तनम जिले में 512 मेगावाट (MW) के ग्रीन इंटीग्रेटेड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इस मेगा प्रोजेक्ट को AM Intelligence Labs Pvt Ltd लीड कर रही है और इसमें ₹31,387 करोड़ का भारी-भरकम निवेश शामिल है। यह फैसिलिटी विशाखापत्तनम के भीमुनिपट्टनम मंडल के अमानम गांव में विकसित की जाएगी।

सरकार की ओर से खास छूटें

इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए, राज्य सरकार ने कई तरह की गैर-वित्तीय और वित्तीय छूटों का ऐलान किया है। इनमें पानी की सप्लाई की गारंटी और विशेष पावर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही, स्टाम्प ड्यूटी और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से भी छूट दी गई है। इन इंसेंटिव्स का मकसद डेवलपर के शुरुआती वित्तीय बोझ को कम करना और निर्माण प्रक्रिया को तेज करना है।

महत्वाकांक्षी 28 महीने की समय-सीमा

सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक सख्त समय-सीमा तय की है। इसके अनुसार, डेटा सेंटर को मंजूरी मिलने की तारीख से 2 साल और 4 महीने यानी 28 महीने के भीतर चालू हालत में लाना होगा। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दिखाता है कि राज्य सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कितनी उत्सुक है। अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से करीब 1,000 नई नौकरियां पैदा होंगी।

प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिम

इतने बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में कुछ जटिल एग्जीक्यूशन रिस्क भी शामिल होते हैं। 512 MW की क्षमता वाले हाइपरस्केल डेटा सेंटर को 28 महीने में तैयार करना एक बहुत ही टाइट डेडलाइन है। निर्माण, परमिट या सप्लाई चेन में किसी भी तरह की देरी से लागत बढ़ सकती है, जिससे प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यवहार्यता पर दबाव आ सकता है।

निर्माण के अलावा, इन सुविधाओं को चलाने में भी बड़ी चुनौतियाँ होती हैं। इतनी बड़ी क्षमता वाले डेटा सेंटर को लगातार और टिकाऊ पावर सप्लाई की जरूरत होती है। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट का वादा किया है, लेकिन 'ग्रीन' डेटा सेंटर के लिए जरूरी भरोसेमंद ग्रीन एनर्जी का सोर्सिंग एक महत्वपूर्ण पहलू होगा। बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स में कूलिंग सिस्टम के लिए पानी का मैनेजमेंट भी एक लॉजिस्टिक चुनौती है।

बढ़ता कॉम्पिटिशन

यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग का हिस्सा है। राज्य में कई बड़े डेटा सेंटर प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, जिससे पावर क्षमता, पानी और कुशल तकनीकी प्रतिभा जैसे क्षेत्रीय संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। इस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को कंपनी की 28 महीने की समय-सीमा का पालन करने की क्षमता, रिन्यूएबल पावर की सोर्सिंग में उसकी प्रगति और यह फैसिलिटी क्षेत्र के मौजूदा डिजिटल नेटवर्क में कैसे एकीकृत होती है, इस पर ध्यान देना चाहिए।

आने वाले समय में, प्रोजेक्ट की शुरुआत, क्लीन एनर्जी के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPAs) पर हस्ताक्षर और निर्माण चरण में प्रवेश करते समय तिमाही प्रगति रिपोर्ट जैसे अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.