Amazon के ठाणे और Google-Adani के विशाखापत्तनम में विशाल डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को बड़े पैमाने पर स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ रहा है। निवासी इन क्षेत्रों में पानी की कमी, बिजली की खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जता रहे हैं। इस स्थिति के चलते कानूनी चुनौतियां और जनहित याचिकाएं दायर हुई हैं, जिससे निवेशकों के लिए प्रोजेक्ट की समय-सीमा और नियामक मंजूरी महत्वपूर्ण हो गई है।
पानी और बिजली की चिंता से घिरे बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स
भारत में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ रहा है। निवासी और पर्यावरण समूह पानी और बिजली की भारी खपत को लेकर चिंताएं उठा रहे हैं। महाराष्ट्र के ठाणे में Amazon की 58 एकड़ की प्रस्तावित डेटा सेंटर सुविधा स्थानीय विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में Google और Adani Group के संयुक्त उद्यम (Joint Venture) द्वारा विकसित किए जा रहे एक बड़े AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को भी ऐसी ही सार्वजनिक जांच का सामना करना पड़ रहा है।
ठाणे के निवासी उठा रहे हैं संसाधनों पर सवाल
ठाणे में स्थानीय सामुदायिक समूहों के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण घनी आबादी वाले इलाके में एक हाई-कैपेसिटी डेटा सेंटर का पड़ने वाला प्रभाव है। निवासियों ने प्रोजेक्ट की बिजली और पानी की भारी मांग पर सवाल उठाए हैं, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जो पहले से ही बाहरी टैंकरों की आपूर्ति पर निर्भर हैं। यह बहस तेज हो गई है कि क्या डेटा सेंटरों को, जिन्हें अक्सर आवश्यक सेवाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, स्थानीय कमी के दौरान उपयोगिताओं तक प्राथमिकता पहुंच मिल सकती है, जो कि आवासीय जरूरतों की कीमत पर हो सकता है।
Amazon ने इन चिंताओं को दूर करते हुए कहा है कि उसकी प्रस्तावित सुविधा कूलिंग सिस्टम के लिए पीने योग्य पानी का उपयोग नहीं करेगी और यह न्यूनतम स्वीकृत दैनिक जल आपूर्ति के साथ संचालित होगी। कंपनी ने भारत में जल-सकारात्मक (Water-Positive) बनने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया है, जिसका लक्ष्य अपने परिचालन द्वारा खपत किए जाने वाले पानी से अधिक समुदाय को वापस लौटाना है। साथ ही, शोर की शिकायतों को दूर करने के लिए ध्वनि-रोधक (Sound-Dampening) तकनीक की योजना भी बनाई गई है।
विशाखापत्तनम प्रोजेक्ट को कानूनी अड़चनों का सामना
विशाखापत्तनम में, विरोध सड़कों से आगे बढ़कर अदालतों तक पहुँच गया है। नागरिक समूहों ने प्रस्तावित Google-Adani AI हब को स्थानीय जलाशयों और वन्यजीव क्षेत्रों के पास स्थित होने पर चिंताएं व्यक्त की हैं। यह मामला आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय तक पहुँच गया है, जहाँ 24 अगस्त, 2026 को इन पर्यावरणीय और जल उपलब्धता के मुद्दों के संबंध में एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई होनी है।
Google का कहना है कि उसके प्रोजेक्ट का गहन पर्यावरणीय मूल्यांकन (Environmental Assessments) किया गया है और इसमें जल निकासी (Drainage) और शोर प्रबंधन (Noise Management) के लिए विशिष्ट सुरक्षा उपाय शामिल हैं। कंपनी ने पारंपरिक कूलिंग विधियों की तुलना में पानी की खपत को काफी कम करने के लिए उन्नत एयर-कूलिंग तकनीकों का उपयोग करने की योजना का भी उल्लेख किया है।
निवेशकों के लिए जोखिम और निगरानी योग्य बातें
निवेशकों के लिए, ये विरोध प्रदर्शन भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश से जुड़े परिचालन जोखिमों (Operational Risks) को उजागर करते हैं। हालांकि डेटा सेंटर देश की AI और क्लाउड ग्रोथ की महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन्हें महत्वपूर्ण पूंजीगत व्यय (CAPEX) और लंबी अवधि की नियामक मंजूरी की आवश्यकता होती है। कानूनी चुनौतियों या स्थानीय दबाव के कारण डिजाइन में अनिवार्य परिवर्तनों से होने वाली किसी भी प्रोजेक्ट देरी से लागत बढ़ सकती है और निवेश पर अपेक्षित रिटर्न कम हो सकता है।
Adani Group के शेयरों में हाल ही में कुछ नकारात्मक दबाव देखा गया है, हालांकि बाजार विश्लेषकों का अक्सर यह मानना है कि यह व्यापक रुझानों के कारण है और निवेशक कंपनी की आक्रामक पूंजीगत व्यय योजनाओं पर सावधानी बरत रहे हैं। शेयरधारकों के लिए मुख्य जोखिम निष्पादन समय-सीमा (Execution Timeline) बना हुआ है। यदि राज्य सरकारें या स्थानीय अधिकारी इन विरोधों के जवाब में सख्त पर्यावरणीय या सामाजिक अनुपालन शर्तें लागू करते हैं, तो व्यापार की लागत बढ़ सकती है। 24 अगस्त को होने वाली अदालत की सुनवाई निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना होगी, क्योंकि इसका परिणाम राज्य में भविष्य के बड़े डेटा सेंटर विकास के लिए नियामक वातावरण पर स्पष्टता प्रदान कर सकता है।
